उम्र Poetry (page 40)

घर हमारा जो न रोते भी तो वीराँ होता

ग़ालिब

एक एक क़तरे का मुझे देना पड़ा हिसाब

ग़ालिब

दीवानगी से दोश पे ज़ुन्नार भी नहीं

ग़ालिब

अजब नशात से जल्लाद के चले हैं हम आगे

ग़ालिब

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक

ग़ालिब

नदी

गीताञ्जलि राय

ज़िंदगी से उम्र-भर तक चलने का वादा किया

गौतम राजऋषि

लम्हा गुज़र गया है कि अर्सा गुज़र गया

गौतम राजऋषि

हवा जब किसी की कहानी कहे है

गौतम राजऋषि

मता-ए-इश्क़ ज़रा और सर्फ़-ए-नाज़ तो हो

गौहर होशियारपुरी

दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह

गणेश बिहारी तर्ज़

दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह

गणेश बिहारी तर्ज़

तेज़ आँधी रात अँधयारी अकेला राह-रौ

फ़ुज़ैल जाफ़री

निभेगी किस तरह दिल सोचता है

फ़ुज़ैल जाफ़री

कैसा मकान साया-ए-दीवार भी नहीं

फ़ुज़ैल जाफ़री

कैसा मकान साया-ए-दीवार भी नहीं

फ़ुज़ैल जाफ़री

दिल मुतमइन है हर्फ़-ए-वफ़ा के बग़ैर भी

फ़ुज़ैल जाफ़री

नए जहाँ में पुरानी शराब ले आए

फ़ितरत अंसारी

तमाम उम्र जो हँसता ही रह गया यारो

फ़िरदौस गयावी

उमीद की कोई चादर तो सामने आए

फ़िरदौस गयावी

तिरी निगाह से बचने में उम्र गुज़री है

फ़िराक़ गोरखपुरी

किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी

फ़िराक़ गोरखपुरी

इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में

फ़िराक़ गोरखपुरी

ज़ेर-ओ-बम से साज़-ए-ख़िलक़त के जहाँ बनता गया

फ़िराक़ गोरखपुरी

ये मौत-ओ-अदम कौन-ओ-मकाँ और ही कुछ है

फ़िराक़ गोरखपुरी

किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी

फ़िराक़ गोरखपुरी

जिसे लोग कहते हैं तीरगी वही शब हिजाब-ए-सहर भी है

फ़िराक़ गोरखपुरी

अब दौर-ए-आसमाँ है न दौर-ए-हयात है

फ़िराक़ गोरखपुरी

जुरअत-ए-इश्क़ हवस-कार हुई जाती है

फ़िगार उन्नावी

ख़राब-हाल हूँ हर हाल में ख़राब रहा

फ़ज़लुर्रहमान

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