उम्र Poetry (page 45)

बीमारी की ख़बर

एहतिशाम हुसैन

गया था बज़्म-ए-मोहब्बत में ख़ाली जाम लिए

एहतिशाम हुसैन

बात अब आई समझ में कि हक़ीक़त क्या थी

एहसान दरबंगावी

हर दर्द से बाँधे हुए रिश्ता कोई गुज़रे

डाक्टर मोहम्मद अली जौहर

ज़माने ठीक है इन से बहुत हुए रौशन

दिनेश नायडू

डरा रहे हैं ये मंज़र भी अब तो घर के मुझे

दिनेश नायडू

मुमकिन है कि मिलते कोई दम दोनों किनारे

दिलावर अली आज़र

मख़्फ़ी हैं अभी दिरहम-ओ-दीनार हमारे

दिलावर अली आज़र

ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़

कश्तियाँ मंजधार में हैं नाख़ुदा कोई नहीं

देवमणि पांडेय

देखना है पिया की ज़ुल्फ़-ए-दराज़

दाऊद औरंगाबादी

मुझ साथ सैर-ए-बाग़ कूँ ऐ नौ-बहार चल

दाऊद औरंगाबादी

फ़रियाद सदा-ए-नफ़स आवाज़-ए-जरस है

दाऊद औरंगाबादी

ख़ुश-फमी-ए-हुनर ने सँभलने नहीं दिया

दरवेश भारती

दर्द औरों का दिल में गर रखिए

दरवेश भारती

पूरा चाँद

दर्शिका वसानी

दौलत मिली जहान की नाम-ओ-निशाँ मिले

दर्शन सिंह

रौंदे है नक़्श-ए-पा की तरह ख़ल्क़ याँ मुझे

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता

दानियाल तरीर

रेत मुट्ठी में भरी पानी से आग़ाज़ किया

दानियाल तरीर

रंग और नूर की तमसील से होगा कि नहीं

दानियाल तरीर

न समझा उम्र गुज़री उस बुत-ए-काफ़र को समझाते

दाग़ देहलवी

तुम आईना ही न हर बार देखते जाओ

दाग़ देहलवी

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

दाग़ देहलवी

पुकारती है ख़मोशी मिरी फ़ुग़ाँ की तरह

दाग़ देहलवी

निगाह-ए-शोख़ जब उस से लड़ी है

दाग़ देहलवी

खुलता नहीं है राज़ हमारे बयान से

दाग़ देहलवी

डरते हैं चश्म ओ ज़ुल्फ़ ओ निगाह ओ अदा से हम

दाग़ देहलवी

नज़रों के गिर्द यूँ तो कोई दायरा न था

डी. राज कँवल

लोग जिन को आज तक बार-ए-गराँ समझा किए

डी. राज कँवल

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