पास Poetry (page 16)

वुसअत है वही तंगी-अफ़्लाक वही है

सलीम कौसर

सरासर नफ़ा था लेकिन ख़सारा जा रहा है

सलीम कौसर

कुछ भी था सच के तरफ़-दार हुआ करते थे

सलीम कौसर

बस लौट आना

सलीम फ़िगार

चमकती ओस की सूरत गुलों की आरज़ू होना

सलीम फ़िगार

मेरी ग़ज़ल में एक नया सोज़-ए-जाँ भी है

सलीम अहमद

मजबूरियों का पास भी कुछ था वफ़ा के साथ

सलीम अहमद

ज़िंदगी

सलाम मछली शहरी

रात कई दिनों से ग़ाएब थी

सलाहुद्दीन परवेज़

ख़ुदा के पास क्या जाएँगे ज़ाहिद

सख़ी लख़नवी

ये तो मालूम कि फिर आइएगा

सख़ी लख़नवी

न बचपन में कहो हम को कड़ी बात

सख़ी लख़नवी

बहार आ कर जो गुलशन में वो गाएँ

सख़ी लख़नवी

रहता है आस-पास सवेरे से शाम तक

साजिद सजनी

दर्द इतना भी नहीं है कि छुपा भी न सकूँ

साजिद हमीद

पंक्चुवेशन

साइमा असमा

हमें ख़बर है वो मेहमान एक रात का है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

हमें ख़बर है वो मेहमान एक रात का है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

बे-ख़ुदी ले उड़ी हवास कहीं

सैफ़ुद्दीन सैफ़

सीने की आग आतिश-ए-महशर हो जिस तरह

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

लहजे का रंग लफ़्ज़ की ख़ुश्बू भी देख ले

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

अब क्या गिला करें कि मुक़द्दर में कुछ न था

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

वो अब्र साया-फ़गन था जो रहमतों की तरह

सैफ़ अली

फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में

साहिर लुधियानवी

ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है

साहिर लुधियानवी

तेरी आवाज़

साहिर लुधियानवी

शिकस्त

साहिर लुधियानवी

मिरे अहद के हसीनो

साहिर लुधियानवी

मायूस तो हूँ वा'दे से तिरे

साहिर लुधियानवी

किसी को उदास देख कर

साहिर लुधियानवी

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