रात Poetry (page 25)

रौशन हैं दिल के दाग़ न आँखों के शब-चराग़

शकेब जलाली

पर्दा-ए-शब की ओट में ज़ोहरा-जमाल खो गए

शकेब जलाली

मुरझा के काली झील में गिरते हुए भी देख

शकेब जलाली

जिस दम क़फ़स में मौसम-ए-गुल की ख़बर गई

शकेब जलाली

जब तक ग़म-ए-जहाँ के हवाले हुए नहीं

शकेब जलाली

इस बुत-कदे में तू जो हसीं-तर लगा मुझे

शकेब जलाली

गूँजता है नाला-ए-महताब आधी रात को

शकेब जलाली

दुनिया वालों ने चाहत का मुझ को सिला अनमोल दिया

शकेब जलाली

दर्द के मौसम का क्या होगा असर अंजान पर

शकेब जलाली

आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो चार गिरे

शकेब जलाली

न दिन पहाड़ लगे अब न रात भारी लगे

शकेब बनारसी

ख़ूनीं गुलाब सब्ज़ सनोबर है सामने

शकेब अयाज़

शब-ए-तन्हाई

शाइस्ता मुफ़्ती

दीवार-ए-गिर्या

शाइस्ता मुफ़्ती

आज लगता है समुंदर में है तुग़्यानी सी

शाइस्ता मुफ़्ती

ख़ाक से उठना ख़ाक में सोना ख़ाक को बंदा भूल गया

शाइस्ता मुफ़्ती

मौत मेरी सखी

शाइस्ता हबीब

न दिन ही चैन से गुज़रा न कोई रात मिरी

शाइक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

तन्हाई से आती नहीं दिन रात मुझे नींद

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

न मैं ने कुछ कहा तुझ से न तू ने मुझ से कुछ पूछा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मज्लिस में रात गिर्या-ए-मस्ताँ था तुझ बग़ैर

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किया था दिन का वादा रात को आया तो क्या शिकवा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरा दिल यार अगर माइल करे है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तरीक़त में अगर ज़ाहिद मुझे गुमराह जाने है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

सब मुख़ालिफ़ जब किनारे हो गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

न इतना चाहिए ऐ पुर-शिकम ख़्वाब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

करूँ हूँ रात दिन फेरे कई फेरे मियाँ साहिब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

होवे वो शोख़-चश्म अगर मुझ से चार चश्म

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देखना उस की तजल्ली का जिसे मंज़ूर है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दौरा है जब से बज़्म में तेरी शराब का

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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