रंग Poetry (page 34)

दिल है बहर-ए-बे-कराँ दिल की उमंग

साहिर देहल्वी

अयाँ हो रंग में और मिस्ल-ए-बू गुल में निहाँ भी हो

साहिर देहल्वी

शफ़्फ़ाफ़ रंग

साहिल अहमद

मुझ को हर लम्हा नई एक कहानी देगा

साहिबा शहरयार

कुल जहाँ इक आईना है हुस्न की तहरीर का

सहबा अख़्तर

जाने क्यूँ रंग-ए-बग़ावत नहीं छुपने पाता

सहर अंसारी

हम को जन्नत की फ़ज़ा से भी ज़ियादा है अज़ीज़

सहर अंसारी

हिसाब-ए-शब

सहर अंसारी

विसाल-ओ-हिज्र से वाबस्ता तोहमतें भी गईं

सहर अंसारी

तंग आते भी नहीं कशमकश-ए-दहर से लोग

सहर अंसारी

किसी भी ज़ख़्म का दिल पर असर न था कोई

सहर अंसारी

कहीं वो चेहरा-ए-ज़ेबा नज़र नहीं आया

सहर अंसारी

हम अहल-ए-ज़र्फ़ कि ग़म-ख़ाना-ए-हुनर में रहे

सहर अंसारी

इक शरार-ए-गिरफ़्ता-रंग हूँ मैं

सहर अंसारी

अपने ख़ूँ से जो हम इक शम्अ जलाए हुए हैं

सहर अंसारी

तेरी नज़र का रंग बहारों ने ले लिया

साग़र सिद्दीक़ी

नज़र नज़र बे-क़रार सी है नफ़स नफ़स में शरार सा है

साग़र सिद्दीक़ी

मता-ए-कौसर-ओ-ज़मज़म के पैमाने तिरी आँखें

साग़र सिद्दीक़ी

मआल-ए-नग़्मा-ओ-मातम फ़रोख़्त होता है

साग़र सिद्दीक़ी

चराग़-ए-तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है

साग़र सिद्दीक़ी

होली

साग़र निज़ामी

सावन की रुत आ पहुँची काले बादल छाएँगे

साग़र निज़ामी

सदियों की शब-ए-ग़म को सहर हम ने बनाया

साग़र निज़ामी

कुछ तो वफ़ा का रंग हो दस्त-ए-जफ़ा के साथ

साग़र मेहदी

उल्टी गंगा

साग़र ख़य्यामी

पड़ोसी की मुर्ग़ियाँ

साग़र ख़य्यामी

होली

साग़र ख़य्यामी

गधों का मुशाएरे

साग़र ख़य्यामी

क्यूँ दिल तिरे ख़याल का हामिल नहीं रहा

साग़र ख़य्यामी

उमीदें मिट गईं अब हम-नफ़स क्या

सफ़िया शमीम

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