रंग Poetry (page 44)

ख़्वाहिश हमारे ख़ून की लबरेज़ अब भी है

इक़बाल अशहर कुरेशी

उर्दू

इक़बाल अशहर

कितने भूले हुए नग़्मात सुनाने आए

इक़बाल अशहर

बैठ जाता था मैं थक कर अपने तन की छाँव में

इंतिख़ाब अालम

नज़ाकत उस गुल-ए-राना की देखियो 'इंशा'

इंशा अल्लाह ख़ान

वो परी ही नहीं कुछ हो के कड़ी मुझ से लड़ी

इंशा अल्लाह ख़ान

तू ने लगाई अब की ये क्या आग ऐ बसंत

इंशा अल्लाह ख़ान

अमरद हुए हैं तेरे ख़रीदार चार पाँच

इंशा अल्लाह ख़ान

वो जो कहीं नहीं है

इंजिला हमेश

सस्ती नज़्म

इंजील सहीफ़ा

कोई गा दे मीठी लोरी सजन

इंजील सहीफ़ा

फ़ज़ा में रंग से बिखरे हैं चाँदनी हुई है

इंजील सहीफ़ा

टूटा फूटा सही एहसास-ए-अना है मुझ में

इंद्र सरूप श्रीवास्तवा

तुम्हारे बिना सब अधूरे हैं जानाँ

इन्दिरा वर्मा

बहारों के आँचल में ख़ुश-बू छुपी है

इन्दिरा वर्मा

शफ़क़ के रंग निकलने के बाद आई है

इन्दिरा वर्मा

मुझे रंग दे न सुरूर दे मिरे दिल में ख़ुद को उतार दे

इन्दिरा वर्मा

मोहब्बत में आया है तन्हा अभी रंग

इन्दिरा वर्मा

काश वो पहली मोहब्बत के ज़माने आते

इन्दिरा वर्मा

इंकिशाफ़

इनाम-उल-हक़ जावेद

वो एक शख़्स कि बाइस मिरे ज़वाल का था

इनाम-उल-हक़ जावेद

ये रंग बे-रंग सारे मंज़र हैं एक जैसे

इनाम कबीर

फिर आस-पास से दिल हो चला है मेरा उदास

इम्तियाज़ अली अर्शी

सुब्ह-दम रोती जो तेरी बज़्म से जाती है शम्अ

इम्दाद इमाम असर

कब ग़ैर हुआ महव तिरी जल्वागरी का

इम्दाद इमाम असर

वो रश्क-ए-मेहर-ओ-क़मर घात पर नहीं आता

इमदाद अली बहर

सर्व में रंग है कुछ कुछ तिरी ज़ेबाई का

इमदाद अली बहर

जज़्ब-ए-उल्फ़त ने दिखाया असर अपना उल्टा

इमदाद अली बहर

हम नाक़िसों के दौर में कामिल हुए तो क्या

इमदाद अली बहर

हम ख़िज़ाँ की अगर ख़बर रखते

इमदाद अली बहर

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