रेगिस्तान Poetry (page 35)

चोब-ए-सहरा भी वहाँ रश्क-ए-समर कहलाए

अता शाद

पस-ए-दीवार हुज्जत किस लिए है

अता आबिदी

कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से

अता आबिदी

रात और रेल

असरार-उल-हक़ मजाज़

इंक़लाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़िज़ाँ का मौसम

असरा रिज़वी

मैं तिरे शहर में फिरती रही मारी मारी

असरा रिज़वी

मुझे दरिया बनाना चाहती है

असलम राशिद

क्यूँ मुझ से गुरेज़ाँ है मैं तेरा मुक़द्दर हूँ

असलम महमूद

जल रहा हूँ तो अजब रंग ओ समाँ है मेरा

असलम महमूद

बुझ गए मंज़र उफ़ुक़ पर हर निशाँ मद्धम हुआ

असलम महमूद

अक्स जल जाएँगे आईने बिखर जाएँगे

असलम महमूद

ऐ मिरे ग़ुबार-ए-सर तू ही तो नहीं तन्हा राएगाँ तो मैं भी हूँ

असलम महमूद

शाम का रक़्स

असलम इमादी

ख़ुद अपनी चाल से ना-आश्ना रहे है कोई

असलम इमादी

जगमगाती ख़्वाहिशों का नूर फैला रात भर

असलम आज़ाद

हर सू है तारीकी छाई तुम भी चुप और हम भी चुप

असलम आज़ाद

हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे

असलम अंसारी

ज़मीं कहीं है मिरी और आसमान कहीं

अासिफ़ शफ़ी

एक यूसुफ़ के ख़रीदार हुए हैं हम लोग

अासिफ़ शफ़ी

ऐ मुझे 'मीर' के अशआ'र सुनाने वाले

अासिफ़ शफ़ी

ज़मीं की रात

आसिफ़ रज़ा

ये दिल में वसवसा क्या पल रहा है

आसिफ़ रज़ा

कैसी आशुफ़्तगी-ए-सर है यहाँ

अासिफ़ जमाल

रेत आँखों में भर गया दरिया

अासिफ़ अंजुम

इक दिन ख़ुद को अपने अंदर फेंकूँगा

अासिफ़ अंजुम

अगर आशिक़ कोई पैदा न होता

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

कश्मकश में हैं तिरी ज़ुल्फ़ों के ज़िंदानी हनूज़

अश्क अमृतसरी

कौन हैं वो जिन्हें आफ़ाक़ की वुसअत कम है

अशफ़ाक़ हुसैन

इतना बे-नफ़अ नहीं उस से बिछड़ना मेरा

अशफ़ाक़ हुसैन

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