शाम Poetry (page 47)

मख़्फ़ी हैं अभी दिरहम-ओ-दीनार हमारे

दिलावर अली आज़र

अजीब रंग अजब हाल में पड़े हुए हैं

दिलावर अली आज़र

मय-ए-कौसर का असर चश्म-ए-सियह-फ़ाम में है

दिल शाहजहाँपुरी

सलोनी शाम के आँगन में जब दो वक़्त मिलते हैं

दीपक क़मर

रूह-ए-आवारा

दाऊद ग़ाज़ी

क्या वहीं मिलोगे तुम

दर्शिका वसानी

एक और शराबी शाम

दर्शिका वसानी

रक़्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

दर्शन सिंह

राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी राज़-ए-निहाँ है आज भी

दर्शन सिंह

क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात से अहल-ए-जहाँ मफ़र नहीं

दर्शन सिंह

किसी की शाम-ए-सादगी सहर का रंग पा गई

दर्शन सिंह

गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं

दर्शन सिंह

चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं

दर्शन सिंह

शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता

दानियाल तरीर

कोई सिवा-ए-बदन है न है वरा-ए-बदन

दानियाल तरीर

सितम के बा'द भी बाक़ी करम की आस तो है

दानिश फ़राही

हश्र इक गुज़रा है वीराने पे घर होने तक

दानिश फ़राही

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था

दाग़ देहलवी

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

दाग़ देहलवी

रंज की जब गुफ़्तुगू होने लगी

दाग़ देहलवी

क्या तर्ज़-ए-कलाम हो गई है

दाग़ देहलवी

हाथ निकले अपने दोनों काम के

दाग़ देहलवी

बाब-ए-रहमत पे दुआ गिर्या-कुनाँ हो जैसे

दाएम ग़व्वासी

बी.टी-नामा

कर्नल मोहम्मद ख़ान

मोहब्बत की गली से हम जहाँ हो कर निकल आए

चित्रांश खरे

काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे

चित्रांश खरे

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

फ़ज़ा-ए-ना-उमीदी में उमीद-अफ़ज़ा पयाम आया

चरख़ चिन्योटी

तय हुआ दिन कि खुले शाम के बिस्तर चलिए

चराग़ बरेलवी

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