शाम Poetry (page 66)

फेंकते संग-ए-सदा दरिया-ए-वीरानी में हम

अहमद महफ़ूज़

नहीं आसमाँ तिरी चाल में नहीं आऊँगा

अहमद महफ़ूज़

कोई हैरत है न इस बात का रोना है हमें

अहमद ख़याल

हर एक रंग धनक की मिसाल ऐसा था

अहमद ख़याल

फ़ीरोज़ी तस्बीह का घेरा हाथ में जल्वा-अफ़्गन था

अहमद जहाँगीर

क्या रोज़-ए-हश्र दूँ तुझे ऐ दाद-गर जवाब

अहमद हुसैन माइल

शाम

अहमद हमेश

रास्ते में शाम का मुक़द्दर होना

अहमद हमेश

सुब्ह-ए-फ़िराक़ अल-अमाँ वस्ल की शाम अल-अमाँ

अहमद हमेश

जहाँ से होता है प्यारे ख़ुदा का नाम शुरूअ'

अहमद हमेश

नहीं मिलते वो अब तो क्या बात है

अहमद हमदानी

गर्द कैसी है ये धुआँ सा क्या

अहमद हमदानी

ज़िंदगी फैली हुई थी शाम-ए-हिज्राँ की तरह

अहमद फ़राज़

साक़िया एक नज़र जाम से पहले पहले

अहमद फ़राज़

सामने उम्र पड़ी है शब-ए-तन्हाई की

अहमद फ़राज़

दिल-गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए

अहमद फ़राज़

ज़ेर-ए-लब

अहमद फ़राज़

तो बेहतर है यही

अहमद फ़राज़

भली सी एक शक्ल थी

अहमद फ़राज़

बन-बास की एक शाम

अहमद फ़राज़

ऐ मेरे सारे लोगो

अहमद फ़राज़

उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया

अहमद फ़राज़

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अहमद फ़राज़

सुकूत-ए-शाम-ए-ख़िज़ाँ है क़रीब आ जाओ

अहमद फ़राज़

साक़िया एक नज़र जाम से पहले पहले

अहमद फ़राज़

रात के पिछले पहर रोने के आदी रोए

अहमद फ़राज़

हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू

अहमद फ़राज़

दिल-गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए

अहमद फ़राज़

बैठे थे लोग पहलू-ब-पहलू पिए हुए

अहमद फ़राज़

वक़्त के हर इक नक़्श का मअ'नी इतना बदला बदला होगा

अहमद फ़क़ीह

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