शमा Poetry (page 5)

मंज़िलों उस को आवाज़ देते रहे मंज़िलों जिस की कोई ख़बर भी न थी

ताब असलम

दो दमों से है फ़क़त गोर-ए-ग़रीबाँ आबाद

तअशशुक़ लखनवी

वही गुल है गुलिस्ताँ में वही है शम्अ' महफ़िल में

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

वज़ीर का ख़्वाब

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

मुशाएरा

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

सिगरेट और पान का मुकालिमा

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

शगुफ़्ता हो के बैठे थे वो अपने बे-क़रारों में

सय्यद फ़रज़नद अहमद सफ़ीर

वजूद मिट गया परवानों के सँभलने तक

सालेह नदीम

सती

सुरूर जहानाबादी

पदमनी

सुरूर जहानाबादी

गंगा जी

सुरूर जहानाबादी

बुलबुल ओ परवाना

सुरूर जहानाबादी

न किसी को फ़िक्र-ए-मंज़िल न कहीं सुराग़-ए-जादा

सुरूर बाराबंकवी

हमारे हाल की जा कर उन्हें ख़बर तो करें

सूरज नारायण

वहशत-ए-दस्त-ओ-गरेबाँ न तुझे है न मुझे

सुल्तान गौरी

तुम आसमाँ की तरफ़ न देखो

सूफ़ी तबस्सुम

नज़र में ढल के उभरते हैं दिल के अफ़्साने

सूफ़ी तबस्सुम

नज़र में ढल के उभरते हैं दिल के अफ़्साने

सूफ़ी तबस्सुम

याद आती है तिरी यूँ मिरे ग़म-ख़ाने में

सुदर्शन कुमार वुग्गल

आज है कुछ सबब आज की शब न जा

सुबहान असद

रात भर शम्अ जलाता हूँ बुझाता हूँ 'सिराज'

सिराज लखनवी

रात भर शम्अ' जलाता हूँ बुझाता हूँ 'सिराज'

सिराज लखनवी

हर अश्क-ए-सुर्ख़ है दामान-ए-शब में आग का फूल

सिराज लखनवी

यौम-ए-आज़ादी

सिराज लखनवी

निगाह-ए-यार यूँही और चंद पैमाने

सिराज लखनवी

जलती रहना शम-ए-हयात

सिराज लखनवी

मत करो शम्अ को बदनाम जलाती वो नहीं

सिराज औरंगाबादी

था बहाना मुझे ज़ंजीर के हिल जाने का

सिराज औरंगाबादी

तिरी ज़ुल्फ़ ज़ुन्नार का तार है

सिराज औरंगाबादी

सुने रातों कूँ गर जंगल में मेरे ग़म की वावैला

सिराज औरंगाबादी

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