सूरज Poetry (page 24)

जब वो मह-ए-रुख़्सार यकायक नज़र आया

दाऊद औरंगाबादी

जब मोहब्बत का किसी शय पे असर हो जाए

दरवेश भारती

क्या वहीं मिलोगे तुम

दर्शिका वसानी

रक़्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

दर्शन सिंह

नई नई सूरतें बदन पर उजालता हूँ

दानियाल तरीर

ब-तर्ज़-ए-ख़्वाब सजानी पड़ी है आख़िर-कार

दानियाल तरीर

अजब रंग-ए-तिलस्म-ओ-तर्ज़-ए-नौ है

दानियाल तरीर

क़तरा क़तरा एहसास

चन्द्रभान ख़याल

गुम-शुदा आदमी का इंतिज़ार

चन्द्रभान ख़याल

ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है

चाँदनी पांडे

पास होने का इशारा मिल गया

बबल्स होरा सबा

तड़ख़न

बिलाल अहमद

शफ़क़ से बाम-ए-फ़लक लाला-गूँ भी होता है

बिलाल अहमद

ये सूरज कब निकलता है उन्हीं से पूछना होगा

भारत भूषण पन्त

मुस्तक़िल रोने से दिल की बे-कली बढ़ जाएगी

भारत भूषण पन्त

ख़्वाब जीने नहीं देंगे तुझे ख़्वाबों से निकल

भारत भूषण पन्त

इश्क़ का रोग तो विर्से में मिला था मुझ को

भारत भूषण पन्त

एक नए साँचे में ढल जाता हूँ मैं

भारत भूषण पन्त

आईने से पर्दा कर के देखा जाए

भारत भूषण पन्त

तो पहले मेरा ही हाल-ए-तबाह लिख लीजे

बेकल उत्साही

ये दिल जो मुज़्तरिब रहता बहुत है

बेदिल हैदरी

रहने दे रतजगों में परेशाँ मज़ीद उसे

बेदिल हैदरी

ग़म-ए-आफ़ाक़ में आरिफ़ अगर करवट बदलता है

बेबाक भोजपुरी

हब्स के दिनों में भी घर से कब निकलते हैं

बशीर सैफ़ी

चले भी आओ कि ये डूबता हुआ सूरज

बशीर फ़ारूक़ी

मिरे बदन में छुपी आग को हवा देगा

बशीर फ़ारूक़ी

वो कभी शाख़-ए-गुल-ए-तर की तरह लगता है

बशीर फ़ारूक़

पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है

बशीर बद्र

ख़ानदानी रिश्तों में अक्सर रक़ाबत है बहुत

बशीर बद्र

इक परी के साथ मौजों पर टहलता रात को

बशीर बद्र

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