वफ़ा Poetry (page 34)

मंज़िल के ख़्वाब देखते हैं पाँव काट के

हिमायत अली शाएर

कब तक रहूँ मैं ख़ौफ़-ज़दा अपने आप से

हिमायत अली शाएर

दस्तक हवा ने दी है ज़रा ग़ौर से सुनो

हिमायत अली शाएर

सितम तीर-ए-निगाह-ए-दिलरुबा था

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

शब-ए-फ़िराक़ कुछ ऐसा ख़याल-ए-यार रहा

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

मुझे फ़रेब-ए-वफ़ा दे के दम में लाना था

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

दुआ ही वज्ह-ए-करामात थोड़ी होती है

हिजाब अब्बासी

दिल शादमाँ हो ख़ुल्द की भी आरज़ू न हो

हीरा लाल फ़लक देहलवी

इस तरह पैकर-ए-वफ़ा हो जाएँ

हज़ीं लुधियानवी

दास्तान-ए-फ़ितरत है ज़र्फ़ की कहानी है

हयात वारसी

पर-ए-जिब्रील भी जिस राह में जल जाते हैं

हयात मदरासी

अब दिलों में कोई गुंजाइश नहीं मिलती 'हयात'

हयात लखनवी

सिलसिला ख़्वाबों का सब यूँही धरा रह जाएगा

हयात लखनवी

करते हैं शौक़-ए-दीद में बातें हवा से हम

हातिम अली मेहर

बुतों का सामना है और मैं हूँ

हातिम अली मेहर

कहीं ख़ुलूस कहीं दोस्ती कहीं पे वफ़ा

हस्तीमल हस्ती

ख़्वाब में तेरा आना-जाना पहले भी था आज भी है

हस्तीमल हस्ती

चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं

हस्तीमल हस्ती

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ

हसरत मोहानी

कभी की थी जो अब वफ़ा कीजिएगा

हसरत मोहानी

इल्तिफ़ात-ए-यार था इक ख़्वाब-ए-आग़ाज़-ए-वफ़ा

हसरत मोहानी

हम जौर-परस्तों पे गुमाँ तर्क-ए-वफ़ा का

हसरत मोहानी

'हसरत' जो सुन रहे हैं वो अहल-ए-वफ़ा का हाल

हसरत मोहानी

वो चुप हो गए मुझ से क्या कहते कहते

हसरत मोहानी

वस्ल की बनती हैं इन बातों से तदबीरें कहीं

हसरत मोहानी

तुझ से गरवीदा यक ज़माना रहा

हसरत मोहानी

तोड़ कर अहद-ए-करम ना-आश्ना हो जाइए

हसरत मोहानी

सियहकार थे बा-सफ़ा हो गए हम

हसरत मोहानी

सितम हो जाए तम्हीद-ए-करम ऐसा भी होता है

हसरत मोहानी

क़िस्मत-ए-शौक़ आज़मा न सके

हसरत मोहानी

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