वसल Poetry (page 24)

फ़र्ज़ी लतीफ़ा

अकबर इलाहाबादी

हल्क़े नहीं हैं ज़ुल्फ़ के हल्क़े हैं जाल के

अकबर इलाहाबादी

आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते

अकबर इलाहाबादी

किसी की क़ैद से आज़ाद हो के रह गए हैं

अजमल सिराज

कभी ख़ौफ़ था तिरे हिज्र का कभी आरज़ू के ज़वाल का

अजमल सिद्दीक़ी

न नज़र से कोई गुज़र सका न ही दिल से मलबा हटा सका

अजमल सिद्दीक़ी

वो जो फूल थे तिरी याद के तह-ए-दस्त-ए-ख़ार चले गए

अजय सहाब

है एक ही लम्हा जो कहीं वस्ल कहीं हिज्र

ऐन ताबिश

इक शहर था इक बाग़ था

ऐन ताबिश

आवारा भटकता रहा पैग़ाम किसी का

ऐन ताबिश

अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर

अहसन मारहरवी

अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर

अहसन मारहरवी

क्या पता किस जुर्म की किस को सज़ा देता हूँ मैं

अहमद ज़फ़र

साग़र क्यूँ ख़ाली है मिरा ऐ साक़ी तिरे मयख़ाने में

अहमद शाहिद ख़ाँ

ग़म के बादल हैं ये ढल जाएँगे रफ़्ता रफ़्ता

अहमद शाहिद ख़ाँ

शब ढले गुम्बद-ए-असरार में आ जाता है

अहमद रिज़वान

दर्द-ए-मुश्तरक

अहमद राही

यकसाँ हैं फ़िराक़-ए-वस्ल दोनों

अहमद नदीम क़ासमी

एहसास में फूल खिल रहे हैं

अहमद नदीम क़ासमी

हर लम्हा ज़ुल्मतों की ख़ुदाई का वक़्त है

अहमद मुश्ताक़

छिन गई तेरी तमन्ना भी तमन्नाई से

अहमद मुश्ताक़

तुम्हारे वस्ल का जिस दिन कोई इम्कान होता है

अहमद कमाल परवाज़ी

मैं रंग-ए-आसमाँ कर के सुनहरी छोड़ देता हूँ

अहमद कमाल परवाज़ी

निहाल-ए-वस्ल नहीं संग-बार करने को

अहमद जावेद

वा'दा किया है ग़ैर से और वो भी वस्ल का

अहमद हुसैन माइल

शब-ए-माह में जो पलंग पर मिरे साथ सोए तो क्या हुए

अहमद हुसैन माइल

प्यार अपने पे जो आता है तो क्या करते हैं

अहमद हुसैन माइल

निकली जो रूह हो गए अजज़ा-ए-तन ख़राब

अहमद हुसैन माइल

महशर में चलते चलते करूँगा अदा नमाज़

अहमद हुसैन माइल

सुब्ह-ए-फ़िराक़ अल-अमाँ वस्ल की शाम अल-अमाँ

अहमद हमेश

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