याद Poetry (page 62)

संग-ए-दर देख के सर याद आया

फ़ानी बदायुनी

क्या कहिए कि बेदाद है तेरी बेदाद

फ़ानी बदायुनी

ख़ुदा असर से बचाए इस आस्ताने को

फ़ानी बदायुनी

ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का

फ़ानी बदायुनी

इक फ़साना सुन गए इक कह गए

फ़ानी बदायुनी

दिल की काया ग़म ने वो पल्टी कि तुझ सा बन गया

फ़ानी बदायुनी

दिल और दिल में याद किसी ख़ुश-ख़िराम की

फ़ानी बदायुनी

दैर में या हरम में गुज़रेगी

फ़ानी बदायुनी

अब लब पे वो हंगामा-ए-फ़रियाद नहीं है

फ़ानी बदायुनी

जब सफ़ीना मौज से टकरा गया

फ़ना निज़ामी कानपुरी

दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते

फ़ना निज़ामी कानपुरी

वो जाने कितना सर-ए-बज़्म शर्मसार हुआ

फ़ना निज़ामी कानपुरी

मुझे प्यार से तिरा देखना मुझे छुप छुपा के वो देखना

फ़ना निज़ामी कानपुरी

जब भी नज़्म-ए-मै-कदा बदला गया

फ़ना निज़ामी कानपुरी

दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते

फ़ना निज़ामी कानपुरी

उन के जल्वों पे हमा-वक़्त नज़र होती है

फ़ना बुलंदशहरी

तिरा ग़म रहे सलामत यही मेरी ज़िंदगी है

फ़ना बुलंदशहरी

मिरे दाग़-ए-दिल वो चराग़ हैं नहीं निस्बतें जिन्हें शाम से

फ़ना बुलंदशहरी

है वज्ह कोई ख़ास मिरी आँख जो नम है

फ़ना बुलंदशहरी

बा-होश वही हैं दीवाने उल्फ़त में जो ऐसा करते हैं

फ़ना बुलंदशहरी

दीवाना-पन और बेकारी मिलती है

फख़्र अब्बास

तसव्वुर में कोई आया सुकून-ए-क़ल्ब-ओ-जाँ हो कर

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

फिर ज़बान-ए-इश्क़ चश्म-ए-ख़ूँ-फिशाँ होने लगी

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

गुलों के चेहरा-ए-रंगीं पे वो निखार नहीं

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

जाने क्या सोच के उस ने सितम ईजाद किया

फ़ैज़ुल हसन

दिन उतरते ही नई शाम पहन लेता हूँ

फ़ैज़ ख़लीलाबादी

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जब तुझे याद कर लिया सुब्ह महक महक उठी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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