जीवन Poetry (page 39)

क़दम ज़मीं पे न थे राह हम बदलते क्या

राजेन्द्र मनचंदा बानी

आज इक लहर भी पानी में न थी

राजेन्द्र मनचंदा बानी

कहीं से मौत को लाओ कि ग़म की रात कटे

राजेन्द्र कृष्ण

ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है

राजेश रेड्डी

मिरी इक ज़िंदगी के कितने हिस्से-दार हैं लेकिन

राजेश रेड्डी

कुछ इस तरह गुज़ारा है ज़िंदगी को हम ने

राजेश रेड्डी

बहाना कोई तो ऐ ज़िंदगी दे

राजेश रेड्डी

ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ

राजेश रेड्डी

ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है

राजेश रेड्डी

यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है

राजेश रेड्डी

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है

राजेश रेड्डी

कुछ इस क़दर मैं ख़िरद के असर में आ गया हूँ

राजेश रेड्डी

किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता

राजेश रेड्डी

हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है

राजेश रेड्डी

क्या क्या सवाल मेरी नज़र पूछती रही

राजेन्द्र नाथ रहबर

जब तक मुझे नसीब तिरी दोस्ती रही

राज कुमार सूरी नदीम

गुज़ारे तुम ने कैसे रोज़-ओ-शब हम से ख़फ़ा हो कर

राज कुमार सूरी नदीम

शामिल तू मिरे जिस्म मैं साँसों की तरह है

रईस सिद्दीक़ी

सभी अंधेरे समेटे हुए पड़े रहना

रईस सिद्दीक़ी

किसी का जिस्म हुआ जान-ओ-दिल किसी के हुए

रईस सिद्दीक़ी

खोने की बात और न पाने की बात है

रईस सिद्दीक़ी

जिगर से जान से प्यारे कहाँ है कुछ तो बता

रईस सिद्दीक़ी

हर इक मंज़र बदलता जा रहा है

रईस सिद्दीक़ी

ख़ामोश ज़िंदगी जो बसर कर रहे हैं हम

रईस अमरोहवी

हम अपनी ज़िंदगी तो बसर कर चुके 'रईस'

रईस अमरोहवी

ख़ामोश ज़िंदगी जो बसर कर रहे हैं हम

रईस अमरोहवी

ग़ुरूब-ए-मेहर का मातम है गुलिस्तानों में

रईस अमरोहवी

कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी मैं ने

रहमत इलाही बर्क़ आज़मी

हादसों ही में ज़िंदगी जी है

रहमत अमरोहवी

क्या क्या गुमाँ न थे मुझे अपनी उड़ान पर

रहमान ख़ावर

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