जीवन Poetry (page 38)

हुस्न-ए-बज़्म-ए-मिसाल में क्या है

रसा चुग़ताई

हर इक दरवेश का क़िस्सा अलग है

रसा चुग़ताई

तुझ आँख से झलकता था एहसास-ए-ज़िंदगी

राना आमिर लियाक़त

ये जो चार दिन की थी ज़िंदगी इसे तेरे नाम न कर सका

राना आमिर लियाक़त

मानूस रौशनी हुई मेरे मकान से

राना आमिर लियाक़त

होता है मेहरबान कहाँ पर ख़ुदा-ए-इश्क़

राना आमिर लियाक़त

एक तू, एक आशिक़ी मेरी

राना आमिर लियाक़त

बर्फ़ पिघली तो रास्ता निकला

राना आमिर लियाक़त

तुम्हारे साथ कई रंज बाँटने हैं हमें

रम्ज़ी असीम

मुझ में ख़ुश्बू बसी उसी की है

रम्ज़ी असीम

ये ज़िंदगी सज़ा के सिवा और कुछ नहीं

रम्ज़ अज़ीमाबादी

कुछ इस अदा से सफ़ीरान-ए-नौ-बहार चले

रम्ज़ अज़ीमाबादी

काश मेरे डूबने का वो भी मंज़र देखता

राम नाथ असीर

ये टूटी कश्तियाँ और बहर-ए-ग़म के तेज़ धारे हैं

राम कृष्ण मुज़्तर

मिरी ज़िंदगी भी तू है मिरा मुद्दआ' भी तू है

राम कृष्ण मुज़्तर

मसअला ये भी ब-फ़ैज़-ए-इश्क़ आसाँ हो गया

राम कृष्ण मुज़्तर

मजबूर तो बहुत हैं मोहब्बत में जी से हम

राम कृष्ण मुज़्तर

ख़िरामाँ शाहिद-ए-सीमीं बदन है

राम कृष्ण मुज़्तर

कहीं राज़-ए-दिल अब अयाँ हो न जाए

राम कृष्ण मुज़्तर

दिल-ओ-नज़र में न पैदा हुई शकेबाई

राम कृष्ण मुज़्तर

बहारें और वो रंगीं नज़ारे याद आते हैं

राम कृष्ण मुज़्तर

नामूस-ए-ज़िंदगी ग़म-ए-इंसाँ में ढाल कर

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

ये ज़ख़्म ज़ख़्म बदन और नम फ़ज़ाओं में

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

क़सीदा फ़त्ह का दुश्मन की तलवारों पे लिक्खा है

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

वो दिलबर हैं तो गोया दिलबरी करनी पड़ेगी

रख़्शंदा नवेद

ये ज़िंदगी तो मुसलसल सवाल करती है

रख़शां हाशमी

कहा गया न कभी और कभी सुना न गया

रख़शां हाशमी

हर इक छोटी से छोटी बात पर नादाँ निकलती है

रजनीश सचन

अना से देखो कितना भर गए हैं

रजनीश सचन

हर जाद-ए-शहर

राजेन्द्र मनचंदा बानी

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