इक़रार

तिरी संजीदा बातें याद आएँ तो हँसाती हैं

तिरी सब भोलपन में की हुई बातें सताती हैं

तिरा ये बचपना तो जाने कब जाएगा जान-ए-जाँ

तुझे भी प्यार करना जाने कब आएगा जान-ए-जाँ

भरी महफ़िल में सब के सामने इक़रार करता हूँ

मैं तुम से प्यार करता हूँ तुम्ही से प्यार करता हूँ

न हो मुझ पर यक़ीं तुम को तो इक दिन आज़मा लेना

और उस के बा'द जान-ए-जाँ मुझे अपना बना लेना

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Iqrar In Hindi By Famous Poet Imran Shanawar. Iqrar is written by Imran Shanawar. Complete Poem Iqrar in Hindi by Imran Shanawar. Download free Iqrar Poem for Youth in PDF. Iqrar is a Poem on Inspiration for young students. Share Iqrar with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.