Nazam Poetry (page 97)
बदन-दरीदा रूहों के नाम एक नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
और हवा चुप रही
इफ़्तिख़ार आरिफ़
अबू-तालिब के बेटे
इफ़्तिख़ार आरिफ़
आख़िरी आदमी का रजज़
इफ़्तिख़ार आरिफ़
वीराना-ए-ख़याल
इफ़्तिख़ार आज़मी
तसव्वुर
इफ़्तिख़ार आज़मी
शौक़
इफ़्तिख़ार आज़मी
नाकामी
इफ़्तिख़ार आज़मी
हासिल
इफ़्तिख़ार आज़मी
एहसास
इफ़्तिख़ार आज़मी
दुनिया
इफ़्तिख़ार आज़मी
आप-बीती
इफ़्तिख़ार आज़मी
मकड़ी
इब्न-ए-मुफ़्ती
अजब है खेल कैरम का
इब्न-ए-मुफ़्ती
ये सराए है
इब्न-ए-इंशा
ये कौन आया
इब्न-ए-इंशा
ये बच्चा किस का बच्चा है
इब्न-ए-इंशा
ये बातें झूटी बातें हैं
इब्न-ए-इंशा
सब माया है
इब्न-ए-इंशा
पिछले-पहर के सन्नाटे में
इब्न-ए-इंशा
फिर शाम हुई
इब्न-ए-इंशा
लोग पूछेंगे
इब्न-ए-इंशा
लब पर नाम किसी का भी हो
इब्न-ए-इंशा
क्या धोका देने आओगी
इब्न-ए-इंशा
कुछ दे इसे रुख़्सत कर
इब्न-ए-इंशा
कातिक का चाँद
इब्न-ए-इंशा
कल हम ने सपना देखा है
इब्न-ए-इंशा
झुलसी सी इक बस्ती में
इब्न-ए-इंशा
इस बस्ती के इक कूचे में
इब्न-ए-इंशा
घूम रहा है पीत का प्यासा
इब्न-ए-इंशा