बदन Poetry (page 32)

कोई सिवा-ए-बदन है न है वरा-ए-बदन

दानियाल तरीर

गया कि सैल-ए-रवाँ का बहाव ऐसा था

दानियाल तरीर

ब-तर्ज़-ए-ख़्वाब सजानी पड़ी है आख़िर-कार

दानियाल तरीर

नज़्म

चाैधरी मोहम्मद नईम

जंग

चन्द्रभान ख़याल

प्यार है वो

बिमल कृष्ण अश्क

नज़्म

बिमल कृष्ण अश्क

नाम उस का

बिमल कृष्ण अश्क

नास्टैल्जिया

बिलाल अहमद

न क़रीब आ न तो दूर जा ये जो फ़ासला है ये ठीक है

भवेश दिलशाद

अजब सी आग थी जलता रहा बदन सारा

बशीर फ़ारूक़ी

शहर-ए-फ़स्ल-ए-गुल से चल कर पत्थरों के दरमियाँ

बशीर फ़ारूक़ी

मिरे बदन में छुपी आग को हवा देगा

बशीर फ़ारूक़ी

मैं जितनी देर तिरी याद में उदास रहा

बशीर फ़ारूक़ी

वो कभी शाख़-ए-गुल-ए-तर की तरह लगता है

बशीर फ़ारूक़

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

बशीर बद्र

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

बशीर बद्र

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मिरा ज़वाल नहीं

बशीर बद्र

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

बशीर बद्र

मिरी ज़िंदगी भी मिरी नहीं ये हज़ार ख़ानों में बट गई

बशीर बद्र

इक परी के साथ मौजों पर टहलता रात को

बशीर बद्र

गिरफ़्त-ए-ज़ीस्त में हूँ क़ैद-ए-बे-हिसार में हूँ

बशीर अहमद बशीर

अबदियत

बशर नवाज़

क़लम सिफ़त में पस-अज़-मरातिब बदन सना में तिरी खपाया

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

खेत से बच कर गुज़रे बस्ती को वीरानी दे

बाक़र नक़वी

ऐ कहकशाँ-नवाज़ मुक़द्दर उजाल दे

बाक़र नक़वी

रहता है ज़ुल्फ़-ए-यार मिरे मन से मन लगा

बाक़र आगाह वेलोरी

सबा के हाथ पीले हो गए

बलराज कोमल

ज़रूरतों की हमाहमी में जो राह चलते भी टोकती है वो शाइ'री है

बद्र-ए-आलम ख़लिश

बाग़-ए-दिल में कोई ग़ुंचा न खिला तेरे बा'द

बदनाम नज़र

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