बाज़ार Poetry (page 16)
तुम आईना ही न हर बार देखते जाओ
दाग़ देहलवी
इस क़दर नाज़ है क्यूँ आप को यकताई का
दाग़ देहलवी
इधर देख लेना उधर देख लेना
दाग़ देहलवी
आओ हुस्न-ए-यार की बातें करें
चराग़ हसन हसरत
समंदर का सुकूत
चन्द्रभान ख़याल
कैसा वो मौसम था ये तो समझ न पाए हम
चंद्र प्रकाश शाद
क्या हुस्न है यूसुफ़ भी ख़रीदार है तेरा
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
ये अदा आप में सरकार कहाँ थी पहले
बुध प्रकाश गुप्ता जौहर देवबंद
सौदा वो क्या करेगा ख़रीदार देख कर
बिस्मिल अज़ीमाबादी
अब दम-ब-ख़ुद हैं नब्ज़ की रफ़्तार देख कर
बिस्मिल अज़ीमाबादी
मैं बंद कमरे की मजबूरियों में लेटा रहा
बिमल कृष्ण अश्क
मिरी भी मान मिरा अक्स मत दिखा मुझ को
बिमल कृष्ण अश्क
मेरी एक बुरी आदत थी
बिलाल अहमद
दीवार-ए-काबा 19 नवम्बर 1989
बिलाल अहमद
लाख टकराते फिरें हम सर दर-ओ-दीवार से
भारत भूषण पन्त
दश्त में उड़ते बगूलों की ये मस्ती एक दिन
भारत भूषण पन्त
कुछ तरह रिंदों ने दी कुछ मोहतसिब भी दब गया
बेख़ुद देहलवी
टूटे पड़ते हैं ये हैं किस के ख़रीदार तमाम
बेख़ुद देहलवी
लड़ाएँ आँख वो तिरछी नज़र का वार रहने दें
बेख़ुद देहलवी
दिल है मुश्ताक़ जुदा आँख तलबगार जुदा
बेख़ुद देहलवी
बड़े अरमान से निकला था शॉपिंग के लिए घर से
बेदिल जौनपूरी
बहुत ज़ोरों पे वी-सी-आर था कल शब जहाँ मैं था
बेदिल जौनपूरी
तरहदार कहाँ से लाऊँ
बेबाक भोजपुरी
रक़्क़ासा-ए-औहाम
बेबाक भोजपुरी
हक़ पसंदों से जहाँ बर-सर-ए-पैकार सही
बेबाक भोजपुरी
बख़्त क्या जाने भला या कि बुरा होता है
बेबाक भोजपुरी
ज़ुल्फ़ तेरी ने परेशाँ किया ऐ यार मुझे
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
चराग़ उस ने बुझा भी दिया जला भी दिया
बशीरुद्दीन अहमद देहलवी
तज़्किरे में तिरे इक नाम को यूँ जोड़ दिया
बशीर फ़ारूक़ी
हम ने तो बाज़ार में दुनिया बेची और ख़रीदी है
बशीर बद्र
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