दर Poetry (page 70)

मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

चाँद सा चेहरा जो उस का आश्कारा हो गया

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

दिल जो सूरत-गर-ए-मअ'नी का सनम-ख़ाना बने

बर्क़ देहलवी

रस्म-ए-सज्दा भी उठा दी हम ने

बाक़ी सिद्दीक़ी

रंग-ए-दिल रंग-ए-नज़र याद आया

बाक़ी सिद्दीक़ी

क्या पता हम को मिला है अपना

बाक़ी सिद्दीक़ी

हर तरफ़ बिखर हैं रंगीं साए

बाक़ी सिद्दीक़ी

उदास बाम है दर काटने को आता है

बाक़ी अहमदपुरी

है दिल में घर को शहर से सहरा में ले चलें

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

है दिल में घर को शहर से सहरा में ले चलें

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

थे हम इस्तादा तिरे दर पे वले बैठ गए

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

सिपाह-ए-इशरत पे फ़ौज-ए-ग़म ने जो मिल के मरकब बहम उठाए

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

सैर में तेरी है बुलबुल बोस्ताँ बे-कार है

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

रखता है यूँ वो ज़ुल्फ़-ए-सियह-फ़ाम दोश पर

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

दस्त-ए-नासेह जो मिरे जेब को इस बार लगा

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

आवे जो नाज़ से मिरा वो बुत-ए-सीम-बर ब-बर

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

आवे जो नाज़ से मिरा वो बुत-ए-सीम-बर ब-बर

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

दवा बग़ैर कोई तिफ़्ल मर गया तो क्या हुआ

बाक़र नक़वी

नई जुस्तुजू का अलमिया

बाक़र मेहदी

जहन्नम

बाक़र मेहदी

तबाह हो के भी इक अपनी आन बाक़ी है

बाक़र मेहदी

दीवानगी की राह में गुम-सुम हुआ न था!

बाक़र मेहदी

जाने क्या सोच के घर तक पहुँचा

बक़ा बलूच

क्यूँ छुपाते हो किधर जाना है

बलवान सिंह आज़र

सर-ए-राहगुज़र एक मंज़र

बलराज कोमल

सर्द, तारीक रात

बलराज कोमल

सबा के हाथ पीले हो गए

बलराज कोमल

ड्रग स्टोर

बलराज कोमल

दिल का मोआ'मला वही महशर वही रहा

बलराज कोमल

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