दर Poetry (page 77)

वो नख़्ल जो बार-वर हुए हैं

असलम अंसारी

लरज़ लरज़ के दिल-ए-ना-तवाँ ठहर ही न जाए

असलम अंसारी

कुछ तो ग़म-ख़ाना-ए-हस्ती में उजाला होता

असलम अंसारी

हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे

असलम अंसारी

बाम-ओ-दर पर उतरने वाली धूप

आसिमा ताहिर

तेरी यादें बहाल रखती है

आसिमा ताहिर

अपनी आँखें जो बंद कर देखूँ

आसिमा ताहिर

या डर मुझे तेरा है कि मैं कुछ नहीं कहता

आसिफ़ुद्दौला

जमाल-ए-यार को तस्वीर करने वाले थे

अासिफ़ शफ़ी

रस्ते की अंजान ख़ुशी है

अासिफ़ साक़िब

ओझल हुई नज़र से बे-बाल-ओ-पर गई है

अासिफ़ साक़िब

नुमू की ख़ाक से उट्ठेगा फिर लहू मेरा

अासिफ़ साक़िब

बारिश कैसी जादूगर है

अासिफ़ साक़िब

दूर की शहज़ादी

आसिफ़ रज़ा

रेत आँखों में भर गया दरिया

अासिफ़ अंजुम

हर एक रुख़ से मुझे लुत्फ़-ए-जुस्तुजू आए

अशरफ़ रफ़ी

बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे

अशरफ़ जावेद

बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे

अशरफ़ जावेद

देखिए ख़ाक में मजनूँ की असर है कि नहीं

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

आलम में अगर इश्क़ का बाज़ार न होता

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

इस को ग़ुरूर-ए-इश्क़ ने क्या क्या बना दिया

अशोक साहनी

अब इस से पहले कि दुनिया से मैं गुज़र जाऊँ

अशोक साहिल

विरासत

अशोक लाल

घर वापसी

अशोक लाल

कश्मकश में हैं तिरी ज़ुल्फ़ों के ज़िंदानी हनूज़

अश्क अमृतसरी

हम ने देखा है इतने खंडर ख़्वाब में

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

तिरी नज़र के इशारे बदल भी सकते हैं

अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी

मैं सीखता रहा इक उम्र हाव-हू करना

अशफ़ाक़ नासिर

हंगाम-ए-शब-ओ-रोज़ में उलझा हुआ क्यूँ हूँ

अशफ़ाक़ हुसैन

सुकूत-ए-शब के हाथों सोंप कर वापस बुलाता है

अशअर नजमी

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