दिल Poetry (page 170)

ख़ुश्की पे रहूँगी कभी पानी में रहूँगी

राशिदा माहीन मलिक

लाख चाहा मैं ने पर्दा सामने आया नहीं

रशीद उस्मानी

तर्क-ए-सितम पे वो जो क़सम खा के रह गए

रशीद रामपुरी

मुफ़्त दुश्नाम-ए-यार सुनते हैं

रशीद रामपुरी

मोहब्बत में दिल-सख़्तियाँ और भी हैं

रशीद रामपुरी

किसी का उन्हें पास-ए-ग़ुर्बत नहीं है

रशीद रामपुरी

किस को लहद और मर्ग का डर हो

रशीद रामपुरी

जिस की गिरह में माल नहीं है

रशीद रामपुरी

जब नज़र उस ने मिलाई होगी

रशीद रामपुरी

है निहायत सख़्त शान-ए-इम्तिहान-ए-कू-ए-दोस्त

रशीद रामपुरी

छुट गए हम जो असीर-ए-ग़म-ए-हिज्राँ हो कर

रशीद रामपुरी

ऐ दिल इस का तुझे अंदाज़-ए-सुख़न याद नहीं

रशीद रामपुरी

अहल-ए-नज़र की आँख में हुस्न की आबरू नहीं

रशीद रामपुरी

यूँ भी इक बज़्म-ए-सदा हम ने सजाई पहरों

रशीद क़ैसरानी

ये ज़ाविया सूरज का बदल जाएगा साईं

रशीद क़ैसरानी

ये कौन सा सूरज मिरे पहलू में खड़ा है

रशीद क़ैसरानी

उठ गई आज चाँद की डोली

रशीद क़ैसरानी

नाम हमारा दुनिया वाले लिखेंगे जी-दारों में

रशीद क़ैसरानी

मैं ने कहीं थीं आप से बातें भली भली

रशीद क़ैसरानी

कौन कहता है तिरे दिल में उतर जाऊँगा

रशीद क़ैसरानी

है शौक़ तो बे-साख़्ता आँखों में समो लो

रशीद क़ैसरानी

गुम-गश्ता मंज़िलों का मुझे फिर निशान दे

रशीद क़ैसरानी

दीप से दीप जलाओ तो कोई बात बने

रशीद क़ैसरानी

बात सूरज की कोई आज बनी है कि नहीं

रशीद क़ैसरानी

ठहर जावेद के अरमाँ दिल-ए-मुज़्तर निकलते हैं

रशीद लखनवी

सिलसिला-जुम्बान-ए-वहशत में नई तदबीर से

रशीद लखनवी

शुरूअ' अहल-ए-मोहब्बत के इम्तिहान हुए

रशीद लखनवी

शराब-ए-नाब का क़तरा जो साग़र से निकल जाए

रशीद लखनवी

राज़ उल्फ़त के अयाँ रात को सारे होते

रशीद लखनवी

न छोड़ा दिल-ए-ख़स्ता-जाँ चलते चलते

रशीद लखनवी

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