शोक Poetry (page 65)

नाम हमारा दुनिया वाले लिखेंगे जी-दारों में

रशीद क़ैसरानी

मिरी जबीं का मुक़द्दर कहीं रक़म भी तो हो

रशीद क़ैसरानी

गुम-गश्ता मंज़िलों का मुझे फिर निशान दे

रशीद क़ैसरानी

नहीं था ज़ख़्म तो आँसू कोई सजा लेता

रशीद निसार

राज़ उल्फ़त के अयाँ रात को सारे होते

रशीद लखनवी

मुझ को मंज़ूर है मरने पे सुबुक-बारी हो

रशीद लखनवी

ख़ार-ओ-ख़स फेंके चमन के रास्ते जारी करे

रशीद लखनवी

जिस को आदत वस्ल की हो हिज्र से क्यूँकर बने

रशीद लखनवी

हम अजल के आने पर भी तिरा इंतिज़ार करते

रशीद लखनवी

गर्दिश-ए-चश्म है पैमाने में

रशीद लखनवी

दिला मा'शूक़ जो होता है वो सफ़्फ़ाक होता है

रशीद लखनवी

डर नहीं थूकते हैं ख़ून जो दुख पाए हुए

रशीद लखनवी

अगर दिला ग़म-ए-गेसू-ए-यार बढ़ जाता

रशीद लखनवी

आँसू की तरह पोंछ के फेंका गया हूँ मैं

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

दिल की इमारत झूटे जज़्बों पर ता'मीर नहीं करना

रशीद अयाँ

वो ख़ुश किसी के साथ हैं ना-ख़ुश किसी के साथ

रसा रामपुरी

कौन सा इश्क़-ए-बुताँ में हमें सदमा न हुआ

रसा रामपुरी

अक्स-ए-ज़ुल्फ़-ए-रवाँ नहीं जाता

रसा चुग़ताई

यूँ गँवाता है कोई जान-ए-अज़ीज़

रसा चुग़ताई

मिट्टी जब तक नम रहती है

रसा चुग़ताई

जब भी तेरी यादों का सिलसिला सा चलता है

रसा चुग़ताई

हम ने तो इस इश्क़ में यारो खींचे हैं आज़ार बहुत

रसा चुग़ताई

यक़ीनन है कोई माह-ए-मुनव्वर पीछे चिलमन के

रंजूर अज़ीमाबादी

रोता हमें जो देखा दिल उस का पिघल गया

रंजूर अज़ीमाबादी

ता हश्र रहे ये दाग़ दिल का

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

कहाँ किसी की हिमायत में मारा जाऊँगा

राणा सईद दोशी

ख़ुशी हम से किनारा कर रही है

राणा गन्नौरी

हमारा दिल तो ग़म में भी ख़ुशी महसूस करता है

राणा गन्नौरी

सुनते हैं कि मिल जाती है हर चीज़ दुआ से

राना अकबराबादी

कुछ इस अदा से सफ़ीरान-ए-नौ-बहार चले

रम्ज़ अज़ीमाबादी

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