प्रेम Poetry (page 66)

उदास देख के वजह-ए-मलाल पूछेगा

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

हर इक क़यास हक़ीक़त से दूर-तर निकला

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

कभी याद-ए-ख़ुदा कभी इश्क़-ए-बुताँ यूँही सारी उम्र गँवा बैठा

फ़य्याज़ तहसीन

आज जाने की ज़िद न करो

फ़य्याज़ हाशमी

सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था

फ़ातिमा हसन

सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था

फ़ातिमा हसन

रूह की माँग है वो जिस्म का सामान नहीं

फ़ातिमा हसन

मिरी ज़मीं पे लगी आप के नगर में लगी

फ़ातिमा हसन

ख़्वाब गिरवी रख दिए आँखों का सौदा कर दिया

फ़ातिमा हसन

मैं अपने दिल की तरह आइना बना हुआ हूँ

फ़रताश सय्यद

कीसा-ए-गुल में बंद थी ख़ुशबू

फ़रताश सय्यद

गली का पत्थर था मुझ में आया बिगाड़ ऐसा

फ़रताश सय्यद

ग़म-ए-इश्क़ ही ने काटी ग़म-ए-इश्क़ की मुसीबत

फ़ारूक़ बाँसपारी

कभी बे-नियाज़-ए-मख़्ज़न कभी दुश्मन-ए-किनारा

फ़ारूक़ बाँसपारी

दिल-ए-ईज़ा-तलब ले तेरा कहना कर लिया मैं ने

फ़ारूक़ बाँसपारी

ये सौदा इश्क़ का आसान सा हे

फ़ारूक़ बख़्शी

न-जाने कितने लहजे और कितने रंग बदलेगा

फ़ारूक़ अंजुम

मैं मो'तबर हूँ इश्क़ मिरा मो'तबर नहीं

फ़ारूक़ अंजुम

जब हर नज़र हो ख़ुद ही तजल्ली-नुमा-ए-ग़म

फ़रहत क़ादरी

ये क्यूँ कहते हो राह-ए-इश्क़ पर चलना है हम को

फ़रहत नदीम हुमायूँ

नहीं होती है राह-ए-इश्क़ में आसान मंज़िल

फ़रहत नदीम हुमायूँ

ये फुर्क़तों में लम्हा-ए-विसाल कैसे आ गया

फ़रहत नदीम हुमायूँ

था पहला सफ़र उस की रिफ़ाक़त भी नई थी

फ़रहत नदीम हुमायूँ

नए मिज़ाज की तश्कील करना चाहते हैं

फ़रहत नदीम हुमायूँ

न दौलत की तलब थी और न दौलत चाहिए है

फ़रहत नदीम हुमायूँ

मसअला आज मिरे इश्क़ का तू हल कर दे

फ़रहत नदीम हुमायूँ

अब ज़िंदगी रो रो के गुज़ारेंगे नहीं हम

फ़रहत नदीम हुमायूँ

कुछ तो वुफ़ूर-ए-शौक़ में बाइ'स-ए-इम्तियाज़ हो

फ़रहत कानपुरी

जो इश्क़ चाहता है वो होना नहीं है आज

फ़रहत एहसास

तराना-ए-रेख़्ता

फ़रहत एहसास

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