आज जाने की ज़िद न करो
आज जाने की ज़िद न करो
यूँ ही पहलू में बैठे रहो
आज जाने की ज़िद न करो
हाए मर जाएँगे, हम तो लुट जाएँगे
ऐसी बातें किया न करो
आज जाने की ज़िद न करो
तुम ही सोचो ज़रा क्यूँ न रोकें तुम्हें
जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम
तुम को अपनी क़सम जान-ए-जाँ
बात इतनी मिरी मान लो
आज जाने की ज़िद न करो
यूँ ही पहलू में बैठे रहो
आज जाने की ज़िद न करो
वक़्त की क़ैद में ज़िंदगी है मगर
चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं
इन को खो कर मिरी जान-ए-जाँ
उम्र-भर ना तरसते रहो
आज जाने की ज़िद न करो
कितना मासूम रंगीन है ये समाँ
हुस्न और इश्क़ की आज मेराज है
कल की किस को ख़बर जान-ए-जाँ
रोक लो आज की रात को
आज जाने की ज़िद न करो
यूँही पहलू में बैठे रहो
आज जाने की ज़िद न करो
(2733) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
फ़य्याज़ हाशमी