जान Poetry (page 49)

मैं उम्र के रस्ते में चुप-चाप बिखर जाता

अज़्म बहज़ाद

बे-हद ग़म हैं जिन में अव्वल उम्र गुज़र जाने का ग़म

अज़्म बहज़ाद

अजीब कैफ़ियत आख़िर तलक रही दिल की

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

मुजस्समा

अज़ीज़ तमन्नाई

ग़रीब शहर

अज़ीज़ क़ैसी

दाद-गर

अज़ीज़ क़ैसी

कंफ़ेशन

अज़ीज़ क़ैसी

बैन-उल-अदमैन

अज़ीज़ क़ैसी

उलझाओ का मज़ा भी तिरी बात ही में था

अज़ीज़ क़ैसी

मिटा के अंजुमन-ए-आरज़ू सदा दी है

अज़ीज़ क़ैसी

हर आँख लहू सागर है मियाँ हर दिल पत्थर सन्नाटा है

अज़ीज़ क़ैसी

आह-ए-बे-असर निकली नाला ना-रसा निकला

अज़ीज़ क़ैसी

मैं नींद के ऐवान में हैरान था कल शब

अज़ीज़ नबील

इस बार हवाओं ने जो बेदाद-गरी की

अज़ीज़ नबील

दश्त-ओ-सहरा में समुंदर में सफ़र है मेरा

अज़ीज़ नबील

बाज़ी-ए-इश्क़ मरे बैठे हैं

अज़ीज़ लखनवी

ये फ़ज़ा-ए-साज़-ओ-मुज़रिब ये हुजूम-ताज-ए-दाराँ

अज़ीज़ हामिद मदनी

हिकायत-ए-हुस्न-ए-यार लिखना हदीस-ए-मीना-ओ-जाम कहना

अज़ीज़ हामिद मदनी

फ़िराक़ से भी गए हम विसाल से भी गए

अज़ीज़ हामिद मदनी

टटोलता हुआ कुछ जिस्म ओ जान तक पहुँचा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

वो ये कह कह के जलाता था हमेशा मुझ को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

टटोलता हुआ कुछ जिस्म ओ जान तक पहुँचा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ज़मीं की ख़ाक तो अफ़्लाक से ज़ियादा है

अज़ीम हैदर सय्यद

सुकून-ए-दिल गया नज़रों से सब क़तारे गए

अज़ीम हैदर सय्यद

ज़ीस्त उनवान तेरे होने का

अज़हर नवाज़

गिर्दाब-ए-रेग-ए-जान से मौज-ए-सराब तक

अज़हर नक़वी

ये कैफ़ियत है मेरी जान अब तुझे खो कर

अज़हर इक़बाल

ये बार-ए-ग़म भी उठाया नहीं बहुत दिन से

अज़हर इक़बाल

ग़मों से यूँ वो फ़रार इख़्तियार करता था

अज़हर इनायती

गुज़रे हुए लम्हात को अब ढूँड रहा हूँ

अज़हर हाश्मी

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