जीने Poetry (page 12)

रिश्ते की सच्चाई

एहसान साक़िब

आया नहीं है राह पे चर्ख़-ए-कुहन अभी

एहसान दानिश

इश्क़ के रस्ते चलते चलते हम ऐसे मजबूर हुए

देवमणि पांडेय

आईने में देख के चेहरा बे-शक मैं हैरान हुआ

देवमणि पांडेय

सुनहरी मछली

दीप्ति मिश्रा

दोनों में कितना फ़र्क़ मगर दोनों का हासिल तन्हाई

दीप्ति मिश्रा

आसानी में जीने में तो ख़र्चा लगता है

दीपक शर्मा दीप

दिल-ए-बे-मुद्दआ का मुद्दआ' क्या

द्वारका दास शोला

वो सलीक़ा हमें जीने का सिखा दे साक़ी

दर्शन सिंह

ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मुझे ये डर है दिल-ए-ज़िंदा तू न मर जाए

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़रीने से अजब आरास्ता क़ातिल की महफ़िल है

दाग़ देहलवी

समंदर का सुकूत

चन्द्रभान ख़याल

अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता

चकबस्त ब्रिज नारायण

फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना

चकबस्त ब्रिज नारायण

अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता

चकबस्त ब्रिज नारायण

पास होने का इशारा मिल गया

बबल्स होरा सबा

सुलगती रेत में इक चेहरा आब सा चमका

बृजेश अम्बर

जब ख़िज़ाँ आई चमन में सब दग़ा देने लगे

बूम मेरठी

क़ाबिल-ए-शरह मिरा हाल-ए-दिल-ए-ज़ार न था

बिस्मिल इलाहाबादी

आज़ार-ओ-जफ़ा-ए-पैहम से उल्फ़त में जिन्हें आराम नहीं

बिस्मिल इलाहाबादी

आरज़ूएँ नज़्र-ए-दौराँ नज़्र-ए-जानाँ हो गईं

बिर्ज लाल रअना

मेरी एक बुरी आदत थी

बिलाल अहमद

ख़्वाब जीने नहीं देंगे तुझे ख़्वाबों से निकल

भारत भूषण पन्त

मुझे जीना नहीं आता

बशर नवाज़

दिल के हर दर्द ने अशआ'र में ढलना चाहा

बशर नवाज़

मैं तेरे हिज्र में जीने से हो गया था उदास

बाक़र आगाह वेलोरी

क्यूँ कर न ऐसे जीने से या रब मलूल हूँ

बाक़र आगाह वेलोरी

अगरचे दिल को ले साथ अपने आया अश्क मिरा

बाक़र आगाह वेलोरी

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