लोग Poetry (page 15)

दुनिया अपनी मौत जल्द-अज़-जल्द मर जाने को है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

दुनिया अपनी मौत जल्द-अज़-जल्द मर जाने को है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

वो कोई और है जिस ने तुझे चाहा होगा

शहज़ाद अहमद

शायद लोग इसी रौनक़ को गर्मी-ए-महफ़िल कहते हैं

शहज़ाद अहमद

लेते हैं लोग साँस भी अब एहतियात से

शहज़ाद अहमद

ये भी सच है कि नहीं है कोई रिश्ता तुझ से

शहज़ाद अहमद

थोड़ा सा रंग रात के चेहरे पे डाल दो

शहज़ाद अहमद

सूरज की किरन देख के बेज़ार हुए हो

शहज़ाद अहमद

न सही कुछ मगर इतना तो किया करते थे

शहज़ाद अहमद

मैं अकेला हूँ यहाँ मेरे सिवा कोई नहीं

शहज़ाद अहमद

जान मुक़द्दर में थी जान से प्यारा न था

शहज़ाद अहमद

डूब जाएँगे सितारे और बिखर जाएगी रात

शहज़ाद अहमद

बाग़ का बाग़ उजड़ गया कोई कहो पुकार कर

शहज़ाद अहमद

अस्ल में हूँ मैं मुजरिम मैं ने क्यूँ शिकायत की

शहज़ाद अहमद

उम्मीद से कम चश्म-ए-ख़रीदार में आए

शहरयार

पल भर में कैसे लोग बदल जाते हैं यहाँ

शहरयार

ज़मीं से ता-ब-फ़लक धुँद की ख़ुदाई है

शहरयार

ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है

शहरयार

उम्मीद से कम चश्म-ए-ख़रीदार में आए

शहरयार

तिलिस्म ख़त्म चलो आह-ए-बे-असर का हुआ

शहरयार

तेरे सिवा भी कोई मुझे याद आने वाला था

शहरयार

सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का

शहरयार

निकला है चाँद शब की पज़ीराई के लिए

शहरयार

नशात-ए-ग़म भी मिला रंज-ए-शाद-मानी भी

शहरयार

मा'बद-ए-ज़ीस्त में बुत की मिसाल जड़े होंगे

शहरयार

खुले जो आँख कभी दीदनी ये मंज़र हैं

शहरयार

जुदा हुए वो लोग कि जिन को साथ में आना था

शहरयार

हवा का ज़ोर ही काफ़ी बहाना होता है

शहरयार

बहते दरियाओं में पानी की कमी देखना है

शहरयार

आँधी की ज़द में शम-ए-तमन्ना जलाई जाए

शहरयार

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