गंतव्य Poetry (page 16)

अब उन्हें मुझ से कुछ हिजाब नहीं

शबनम रूमानी

टूट के बादल फिर बरसा है

शबनम नक़वी

इतना एहसान और करता कौन

शबी फ़ारूक़ी

पाई न कोई मंज़िल पहुँचीं न कहीं राहें

शानुल हक़ हक़्क़ी

नज़र चुरा गए इज़हार-ए-मुद्दआ से मिरे

शानुल हक़ हक़्क़ी

इक तमन्ना कि सहर से कहीं खो जाती है

शानुल हक़ हक़्क़ी

अश्क बहाओ आह भरो फ़रियाद करो

शाद अमृतसरी

ज़ब्त-ए-नावक-ए-ग़म से बात बन तो सकती है

शाद आरफ़ी

उठ गई उस की नज़र मैं जो मुक़ाबिल से उठा

शाद आरफ़ी

क़दम सँभल के बढ़ाओ कि रौशनी कम है

शाद आरफ़ी

इंतिज़ार था हम को ख़ुशनुमा बहारों का

शाद आरफ़ी

होंटों पर महसूस हुई है आँखों से मादूम रही है

शाद आरफ़ी

चाहते हैं घर बुतों के दिल में हम

शाद आरफ़ी

ब-पास-ए-एहतियात-ए-आरज़ू ये बार-हा हुआ

शाद आरफ़ी

हुस्न-ए-फ़ानी पर हम अपना दिल फ़िदा करते रहे

सीमाब बटालवी

सुबू पर जाम पर शीशे पे पैमाने पे क्या गुज़री

सीमाब अकबराबादी

मुरत्तब हो के इक महशर ग़ुबार-ए-दिल से निकलेगा

सीमाब अकबराबादी

जो मेरे तंगना-ए-दिल में तुझ को जल्वा-गर देखा

सीमाब अकबराबादी

हम हैं सर-ता-बा-पा तमन्ना

सीमाब अकबराबादी

चमक जुगनू की बर्क़-ए-बे-अमाँ मालूम होती है

सीमाब अकबराबादी

जिस्म-ए-बे-सर कोई बिस्मिल कोई फ़रियादी था

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

मुझे मुश्किल में यूँ अंदाज़ा-ए-मुश्किल नहीं होता

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

रस्म ही शहर-ए-तमन्ना से वफ़ा की उठ जाए

सय्यद एहतिशाम हुसैन

महफ़िल-ए-दोस्त में गो सीना-फ़िगार आए हैं

सय्यद एहतिशाम हुसैन

ग़म सहे रुस्वा हुए जज़्बात की तहक़ीर की

सय्यद आशूर काज़मी

सरों पे धूप तो आँखों में ख़्वाब पत्थर के

सय्यद सफ़ी हसन

सोख़्ता कश्ती का मलबा मैं मिरा दिल और शाम

सय्यद नसीर शाह

हस्ब-ए-फ़रमान-ए-अमीर-ए-क़ाफ़िला चलते रहे

सय्यद नसीर शाह

फ़ज़ा का हब्स चीरती हुई हवा उठे

सौरभ शेखर

सूरज के उफ़ुक़ होते हैं मंज़िल नहीं होती

सऊद उस्मानी

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