गंतव्य Poetry (page 8)

दिल के सहरा में बड़े ज़ोर का बादल बरसा

ताब असलम

वही गुल है गुलिस्ताँ में वही है शम्अ' महफ़िल में

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

तेरे दर से मैं उठा लेकिन न मेरा दिल उठा

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

है आईना-ख़ाने में तिरा ज़ौक़-फ़ज़ा रक़्स

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

कैफ़-ए-सफ़र अब अपना हासिल

सय्यद सिद्दीक़ हसन

रेज़ा रेज़ा जैसे कोई टूट गया है मेरे अंदर

सय्यद शकील दस्नवी

तू नहीं है तो ज़िंदगी है उदास

सय्यद प्रवेज़

कैफ़ियत ही कैफ़ियत में हम कहाँ तक आ गए

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

बढ़ा तन्हाई में एहसास-ए-ग़म आहिस्ता आहिस्ता

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

फ़िक्र क्यूँ है क़याम करने की

सय्यद मोहम्मद ज़फ़र अशक संभली

मैं नशे में हूँ

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

बस का सफ़र

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

अब और तब

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

किस हसीं ख़्वाब का फ़साना है

सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़

ख़ाक-दाँ को हासिल-ए-ज़ौक़-ए-नज़र समझा था मैं

सय्यद मेराज जामी

ब-हर-लम्हा पिघलता जा रहा हूँ

सय्यद मेराज जामी

या तो वो क़ुर्ब था या दूर हुआ जाता हूँ

सय्यद बशीर हुसैन बशीर

हुस्न की हर अदा पे मरता हूँ

सय्यद बशीर हुसैन बशीर

ठीक है उजली याद का रिश्ता अपने दिल से टूटा भी

सय्यद अारिफ़

रऊनतों में न इतनी भी इंतिहा हो जाए

सय्यद अारिफ़

तुम मिरे पास रहो जिस्म की गरमी बख़्शो

सय्यद अहमद शमीम

न किसी को फ़िक्र-ए-मंज़िल न कहीं सुराग़-ए-जादा

सुरूर बाराबंकवी

कहे तो कौन कहे सरगुज़श्त-ए-आख़िर-ए-शब

सुरूर बाराबंकवी

फ़स्ल-ए-गुल क्या कर गई आशुफ़्ता सामानों के साथ

सुरूर बाराबंकवी

ऐ जुनूँ कुछ तो खुले आख़िर मैं किस मंज़िल में हूँ

सुरूर बाराबंकवी

मेरे और अपने दरमियाँ उस ने

सुरेन्द्र शजर

अपनी अना के गुम्बद-ए-बे-दर में बंद है

सूरज तनवीर

मौसम-ए-गुल कुंज-ए-गुलशन निकहत-ए-गेसू न हो

सुलतान रशक

ख़ुशियाँ न छोड़ अपने लिए ग़म तलब न कर

सुलतान रशक

जो नज़र आता नहीं दीवार में दर और है

सुलतान रशक

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