उम्र Poetry (page 48)

ये ज़र्द बच्चे

बलराज कोमल

तिश्नगी-ए-लब पे हम अक्स-ए-आब लिक्खेंगे

बख़्श लाइलपूरी

रखा सर पर जो आया यार का ख़त

बहराम जी

बहस क्यूँ है काफ़िर-ओ-दीं-दार की

बहराम जी

करेंगे क़स्द हम जिस दम तुम्हारे घर में आवेंगे

ज़फ़र

यास की कोहर में लिपटा हुआ चेहरा देखा

बाग़ हुसैन कमाल

हयात ढूँढ रहा हूँ क़ज़ा की राहों में

बदनाम नज़र

कब बयाबाँ राह में आया ये समझा ही नहीं

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

हम ने आप के ग़म को हम-सफ़र बनाया है

बदर जमाली

कैफ़ियत-ए-दिल-ए-हज़ीं हम से नहीं बयाँ हुई

बीएस जैन जौहर

इक हूक सी जब दिल में उट्ठी जज़्बात हमारे आ पहुँचे

बीएस जैन जौहर

कैसे कैसे स्वाँग रचाए हम ने दुनिया-दारी में

अज़रा नक़वी

एक ज़िंदगी और मिल जाए

अज़रा अब्बास

ख़ून आँसू बन गया आँखों में भर जाने के ब'अद

अज़्म शाकरी

मैं उम्र के रस्ते में चुप-चाप बिखर जाता

अज़्म बहज़ाद

जो यहाँ हाज़िर है वो मिस्ल-ए-गुमाँ मौजूद है

अज़्म बहज़ाद

दिल सोया हुआ था मुद्दत से ये कैसी बशारत जागी है

अज़्म बहज़ाद

बे-हद ग़म हैं जिन में अव्वल उम्र गुज़र जाने का ग़म

अज़्म बहज़ाद

तवील उम्र की ढेरों दुआएँ भेजी हैं

अज़लान शाह

समझ के रस्ता इधर से गुज़रने वालों ने

अज़लान शाह

ये ग़म नहीं कि मुझ को जागना पड़ा है उम्र भर

अज़ीज़ तमन्नाई

उठा के मेरे ज़ेहन से शबाब कोई ले गया

अज़ीज़ तमन्नाई

करते रहे तआ'क़ुब-ए-अय्याम उम्र-भर

अज़ीज़ तमन्नाई

बढ़ने दे अभी कशमकश-ए-तार-ए-नफ़स और

अज़ीज़ तमन्नाई

रफ़्तगाँ

अज़ीज़ क़ैसी

ग़रीब शहर

अज़ीज़ क़ैसी

एक मंज़र एक आलम

अज़ीज़ क़ैसी

उलझाओ का मज़ा भी तिरी बात ही में था

अज़ीज़ क़ैसी

पस-ए-तर्क-ए-इश्क़ भी उम्र-भर तरफ़-ए-मिज़ा पे तरी रही

अज़ीज़ क़ैसी

वो दुख नसीब हुए ख़ुद-कफ़ील होने में

अज़ीज़ नबील

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