रास्ता Poetry (page 13)

हर एक डूबता मंज़र दिखाई देता है

सुनील आफ़ताब

तेरी याद में रोते रोते तुझ जैसा हो जाएगा

सुलतान सुबहानी

आइनों में अक्स बिन कर जिन के पैकर आ गए

सुलतान निज़ामी

अपनी ज़मीं से दूर ज़मान-ओ-मकाँ से दूर

सुलतान फ़ारूक़ी

पस-ए-ग़ुबार-ए-तलब ख़ौफ़-ए-जुस्तुजू है बहुत

सुल्तान अख़्तर

मिरी क़दीम रिवायत को आज़माने लगे

सुल्तान अख़्तर

मैं लड़खड़ाया तो मुझ को गले लगाने लगे

सुल्तान अख़्तर

किसी के वास्ते जीता है अब न मरता है

सुल्तान अख़्तर

ख़ाना-बर्बाद हुए बे-दर-ओ-दीवार रहे

सुल्तान अख़्तर

हरीफ़-ए-वक़्त हूँ सब से जुदा है राह मिरी

सुल्तान अख़्तर

हरा शजर न सही ख़ुश्क घास रहने दे

सुल्तान अख़्तर

शनाख़्त मिट गई चेहरे पे गर्द इतनी थी

सुलेमान ख़ुमार

कुछ नहीं है तो ये अंदेशा ये डर कैसा है

सुलेमान ख़ुमार

नहीं जो तेरी ख़ुशी लब पे क्यूँ हँसी आए

सुलैमान अरीब

भेस क्या क्या न ज़माने में बनाए हम ने

सुलैमान अरीब

वो मिज़ाज दिल के बदल गए कि वो कारोबार नहीं रहा

सुलैमान अहमद मानी

नहीं इस दश्त में कोई ख़िज़र है

सुलैमान अहमद मानी

क्यूँ और ज़ख़्म सीने पे खाओ हो दोस्तो

सुलैमान अहमद मानी

इक तिरा दर्द है तन्हाई है रुस्वाई है

सुलैमान अहमद मानी

हमारे जैसे ही लोगों से शहर भर गए हैं

सुहैल अख़्तर

मैं खो गया तो शहर-ए-फ़न में दस्तियाब हो गया

सुहैल अहमद ज़ैदी

जाँ तन का साथ दे न तो दिल ही वफ़ा करे

सुहैल अहमद ज़ैदी

फ़क़ीह-ए-शहर से रिश्ता बनाए रहता हूँ

सुहैल अहमद ज़ैदी

कब तक भँवर के बीच सहारा मिले मुझे

सुग़रा सदफ़

बंद हो जाए मिरी आँख अगर

सूफ़ी तबस्सुम

ये आज आए हैं किस अजनबी से देस में हम

सूफ़ी तबस्सुम

वो हुस्न को जल्वा-गर करेंगे

सूफ़ी तबस्सुम

वो हुस्न को जल्वा-गर करेंगे

सूफ़ी तबस्सुम

उठी है जो क़दमों से वो दामन से अड़ी है

सूफ़ी तबस्सुम

शजर शजर निगराँ है कली कली बेदार

सूफ़ी तबस्सुम

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.