रास्ता Poetry (page 14)

नज़रों से ग़ुबार छट गए हैं

सूफ़ी तबस्सुम

नाला-ए-सबा तन्हा फूल की हँसी तन्हा

सूफ़ी तबस्सुम

जब भी दो आँसू निकल कर रह गए

सूफ़ी तबस्सुम

जब अश्क तिरी याद में आँखों से ढले हैं

सूफ़ी तबस्सुम

हर एक नक़्श तिरे पाँव का निशाँ सा है

सूफ़ी तबस्सुम

ग़म-नसीबों को किसी ने तो पुकारा होगा

सूफ़ी तबस्सुम

दिल को आए कि निगाहों को यक़ीं आ जाए

सूफ़ी तबस्सुम

बुझी बुझी सी सितारों की रौशनी है अभी

सूफ़ी तबस्सुम

धुँद

सुबोध लाल साक़ी

इस का ग़म है कि मुझे वहम हुआ है शायद

सुबहान असद

फ़सील-ए-दर्द को मैं मिस्मार करने वाली हूँ

सिया सचदेव

दिन को बहर-ओ-बर का सीना चीर कर रख दीजिए

सिराजुद्दीन ज़फ़र

ये वो आज़माइश-ए-सख़्त है कि बड़े बड़े भी निकल गए

सिराज लखनवी

गुनाहगार हूँ ऐसा रह-ए-नजात में हूँ

सिराज लखनवी

तुझ ज़ुल्फ़ में दिल ने गुम किया राह

सिराज औरंगाबादी

दिल में आ राह-ए-चश्म-ए-हैराँ सीं

सिराज औरंगाबादी

मुझ दर्द सें यार आश्ना नईं

सिराज औरंगाबादी

माइल हूँ गुल-बदन का मुझे गुल सीं क्या ग़रज़

सिराज औरंगाबादी

जिस ने तुझ हुस्न पर निगाह किया

सिराज औरंगाबादी

जानाँ पे जी निसार हुआ क्या बजा हुआ

सिराज औरंगाबादी

हर किसी कूँ गुज़र-ए-इश्क़ में आनाँ मुश्किल

सिराज औरंगाबादी

हर हर वरक़ पे क्यूँ कि लिखूँ दास्तान-ए-हिज्र

सिराज औरंगाबादी

गुल-रुख़ों ने किए हैं सैर का ठाट

सिराज औरंगाबादी

कोई महबूब सितमगर भी तो हो सकता है

सिरज़ अालम ज़ख़मी

बहुत उदास है दिल जाने माजरा क्या है

सिरज़ अालम ज़ख़मी

समुंदरों में सराब और ख़ुश्कियों में गिर्दाब देखता है

सिराज अजमली

हसीं यादों से ख़ल्वत अंजुमन है

सिकंदर अली वज्द

सफ़र की धूप ने चेहरा उजाल रक्खा था

सिदरा सहर इमरान

रात हुई फिर हम से इक नादानी थोड़ी सी

सिद्दीक़ मुजीबी

प्यासा जो मेरे ख़ूँ का हुआ था सो ख़्वाब था

सिद्दीक़ मुजीबी

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