साथ Poetry (page 16)

इन बुतों को तो मिरे साथ मोहब्बत होती

ताबाँ अब्दुल हई

ख़ूबाँ जो पहनते हैं निपट तंग चोलियाँ

ताबाँ अब्दुल हई

ऐसा कहाँ हुबाब कोई चश्म-ए-तर कि हम

ताबाँ अब्दुल हई

कोई भी नक़्श सलामत नहीं है चेहरे का

ताब असलम

ता-सहर की है फ़ुग़ाँ जान के ग़ाफ़िल मुझ को

तअशशुक़ लखनवी

महफ़िल से उठाने के सज़ा-वार हमीं थे

तअशशुक़ लखनवी

जोश पर थीं सिफ़त-ए-अब्र-ए-बहारी आँखें

तअशशुक़ लखनवी

हिज्र में तेरे तसव्वुर का सहारा है बहुत

सय्यदा शान-ए-मेराज

बहन की इल्तिजा माँ की मोहब्बत साथ चलती है

सय्यद ज़मीर जाफ़री

पुरानी मोटर

सय्यद ज़मीर जाफ़री

यक़ीं के भी क्या क्या हिजाबात हैं

सय्यद ज़मीर जाफ़री

ख़ुलासा ये मिरे हालात का है

सय्यद ज़मीर जाफ़री

जुनूँ पे जब्र-ए-ख़िरद जब भी होश्यार हुआ

सय्यद ज़मीर जाफ़री

गा रहा हूँ ख़ामुशी में दर्द के नग़्मात मैं

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपनी ख़बर नहीं है ब-जुज़ इस क़दर मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपनी ख़बर नहीं है ब-जुज़ ईं क़दर मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपने ज़र्फ़ अपनी तलब अपनी नज़र की बात है

सय्यद ज़मीर जाफ़री

साँस का अपनी रग-ए-जाँ से गुज़र होने तक

सय्यद तम्जीद हैदर तम्जीद

रिश्ता रहा अजीब मिरा ज़िंदगी के साथ

सय्यद शकील दस्नवी

गर्द-ए-सफ़र के साथ था वाबस्ता इंतिज़ार

सय्यद शकील दस्नवी

ये ज़ाद-ए-राह हमेशा सफ़र में रख लेना

सय्यद शकील दस्नवी

रेज़ा रेज़ा जैसे कोई टूट गया है मेरे अंदर

सय्यद शकील दस्नवी

वो औरत

सय्यद सज्जाद

कही बात उस ने भी ख़दशात की

सय्यद सग़ीर सफ़ी

है समाँ हर तरफ़ बदलने को

सय्यद सग़ीर सफ़ी

कभी बहार न आई बहार की सूरत

सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी

तू अपने हुस्न की आराइशों में गुम हो जा

सय्यद मुनीर

रिवाज-ओ-रस्म का उस को हुनर भी आता है

सय्यद मुनीर

हम से पहले तो कोई यूँ न फिरा आवारा

सय्यद मुनीर

जैसे किसी को ख़्वाब में मैं ढूँढता रहा

सय्यद मुबारक शाह

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