साथ Poetry (page 23)

चमन लहक के रह गया घटा मचल के रह गई

शमीम करहानी

चमन चमन जो ये सुब्ह-ए-बहार की ज़ौ है

शमीम करहानी

जो हँस हँस के हर ग़म गवारा करे है

शमीम जयपुरी

हमारे साथ जिसे मौत से हो प्यार चले

शमीम जयपुरी

तिलिस्म है कि तमाशा है काएनात उस की

शमीम हनफ़ी

रोज़ ओ शब की गुत्थियाँ आँखों को सुलझाने न दे

शमीम हनफ़ी

नीले पीले सियाह सुर्ख़ सफ़ेद सब थे शामिल इसी तमाशे में

शमीम हनफ़ी

आँखें ग़म-ए-फ़िराक़ से हैं तर इधर-उधर

शमीम फ़तेहपुरी

शाकी बद-ज़न आज़ुर्दा हैं मुझ से मेरे भाई यार

शमीम अब्बास

बस एक बार फ़क़त एक बार कम से कम

शमीम अब्बास

ये किस का जल्वा-ए-हैरत-फ़ज़ा निगाह में है

शकूर जावेद

इस घर में मिरे साथ बसर कर के तो देखो

शकील शम्सी

तन्हाई

शकील जाज़िब

हासिल-ए-उम्र है जो एक कसक बाक़ी है

शकील जाज़िब

गर्दिश में ज़हर भी है मुसलसल लहू के साथ

शकील जाज़िब

थोड़ा सा माहौल बनाना होता है

शकील जमाली

न कोई ख़्वाब कमाया न आँख ख़ाली हुई

शकील जमाली

किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है

शकील जमाली

उजाले गर्मी-ए-रफ़्तार का ही साथ देते हैं

शकील बदायुनी

मिरी तेज़-गामियों से नहीं बर्क़ को भी निस्बत

शकील बदायुनी

अपनों ने नज़र फेरी तो दिल तू ने दिया साथ

शकील बदायुनी

ज़मीं पर फ़स्ल-ए-गुल आई फ़लक पर माहताब आया

शकील बदायुनी

वो दिल में रहते हैं दिल का निशाँ नहीं मा'लूम

शकील बदायुनी

सर भी है पा-ए-यार भी शौक़-ए-सिवा को क्या हुआ

शकील बदायुनी

राह-ए-ख़ुदा में आलम-ए-रिन्दाना मिल गया

शकील बदायुनी

नग़्मा-ए-इश्क़ सुनाता हूँ मैं इस शान के साथ

शकील बदायुनी

मौसम-ए-गुल साथ ले कर बर्क़ ओ दाम आ ही गया

शकील बदायुनी

ख़ुश हूँ कि मिरा हुस्न-ए-तलब काम तो आया

शकील बदायुनी

जज़्बात की रौ में बह गया हूँ

शकील बदायुनी

जादा-ए-इश्क़ में गिर गिर के सँभलते रहना

शकील बदायुनी

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