सबसे Poetry (page 10)

ये अहद क्या है कि सब पर गिराँ गुज़रता है

ज़फ़र अज्मी

इक ख़ौफ़-ए-दुश्मनी जो तआक़ुब में सब के है

ज़फ़र अज्मी

ये अहद क्या है कि सब पर गिराँ गुज़रता है

ज़फ़र अज्मी

जान-ए-बे-ताब अजब तेरे ठिकाने निकले

ज़फ़र अज्मी

हर सम्त शोर-ए-बंदा ओ साहिब है शहर में

ज़फ़र अज्मी

मैं जीना चाहता हूँ मगर

यूसुफ़ तक़ी

वैसे तो थे यार बहुत पर किसी ने मुझे पहचाना था

यूसुफ़ तक़ी

शांति

यूसुफ़ राहत

मज़हब-ए-इंसानियत

यूसुफ़ राहत

ज़ख़्मों की मुनाजात में पिन्हाँ वो असर था

युसूफ़ जमाल

सोचा कि वा हो सब्ज़ दरीचा जो बंद था

युसूफ़ जमाल

लग़्ज़िशें तन्हाइयों की सब बता दी जाएँगी

युसूफ़ जमाल

क्या रूप बरस रहा है

यूसुफ़ हसन

क्या सर-ए-तहरीर है और क्या पस-ए-तहरीर देख

यूनुस ग़ाज़ी

दर्द हद से सिवा दिया तू ने

यूनुस ग़ाज़ी

तेरी आँखों से मिली जुम्बिश मिरी तहरीर को

योगेन्द्र बहल तिश्ना

तुम्हारे फूल ताज़ा हैं

यासमीन हामिद

अयाँ हो आप बेगाना बनाया

यासीन अली ख़ाँ मरकज़

तर्क उल्फ़त में भी उस ने ये रिवायत रक्खी

यशब तमन्ना

मिरी दुआओं की सब नग़्मगी तमाम हुई

याक़ूब यावर

सब्र ख़ुद उकता गया अच्छा हुआ

याक़ूब उस्मानी

मिरे चारों तरफ़ एक आहनी दीवार क्यूँ है

याक़ूब तसव्वुर

क्या हुआ हम से जो दुनिया बद-गुमाँ होने लगी

याक़ूब आमिर

इक ख़ला सा है जिधर देखो इधर कुछ भी नहीं

याक़ूब आमिर

उम्र आख़िर है जुनूँ कर लूँ बहाराँ फिर कहाँ

इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन

शब के सब असरार तुम्हारे

यहया अमजद

बाग़ों में आएगी कब बहार

यहया अमजद

बुतों को देख के सब ने ख़ुदा को पहचाना

यगाना चंगेज़ी

ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया

यगाना चंगेज़ी

आँख दिखलाने लगा है वो फ़ुसूँ-साज़ मुझे

यगाना चंगेज़ी

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