रेगिस्तान Poetry (page 30)

आज दिल है कि सर-ए-शाम बुझा लगता है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

क़ाफ़िला उतरा सहरा में और पेश वही मंज़र आए

एजाज़ गुल

मंज़र-ए-वक़्त की यकसानी में बैठा हुआ हूँ

एजाज़ गुल

महमिल है मतलूब न लैला माँगता है

एजाज़ गुल

हर्फ़

एजाज़ फ़ारूक़ी

किस दिल से हम इरादा-ए-तर्क-ए-जुनूँ करें

एजाज़ अासिफ़

हूँ मैं भी शो'बदा कोई दुनिया के सामने

एजाज़ अासिफ़

हुस्न की रीतें इश्क़ की रस्में छोटे बच्चे क्या जानें

एजाज़ अहमद एजाज़

गुलशन-ए-दिल में मिले अक़्ल के सहरा में मिले

एहतिशाम हुसैन

सता रही है बहुत मछलियों की बास मुझे

एहतिशाम अख्तर

मक़्सद-ए-ज़ीस्त ग़म-ए-इश्क़ है सहरा हो कि शहर

एहसान दानिश

न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को

एहसान दानिश

हर दर्द से बाँधे हुए रिश्ता कोई गुज़रे

डाक्टर मोहम्मद अली जौहर

बुलाना और न जाना चाहता हूँ

डॉक्टर आज़म

अश्क पर ज़ोर कुछ चला ही नहीं

डॉक्टर आज़म

रात से दिन का वो जो रिश्ता थी

दिनेश नायडू

पूछता कौन वफ़ा से उस की

दिनेश नायडू

मुझ में आबाद सराबों का इलाक़ा करने

दिनेश नायडू

मिरे कमरे में पूरी चाँदनी है

दिनेश नायडू

जो भी निकले तिरी आवाज़ लगाता निकले

दिनेश नायडू

चाक पर मिट्टी को मर जाना है

दिनेश नायडू

कितने मेले हैं आसमानों में

दिलकश सागरी

लैला मजनूँ की शादी

दिलावर फ़िगार

क्या कहिए दास्तान-ए-तमन्ना बदल गई

दिल शाहजहाँपुरी

नज़र आया न कोई भी इधर देखा उधर देखा

दीपक क़मर

ग़म-ए-हयात पे ख़ंदाँ हैं तेरे दीवाने

दर्शन सिंह

बिला-जवाज़ नहीं है फ़लक से जंग मिरी

दानियाल तरीर

एक दिन नक़्श-ए-क़दम पर मिरे बन जाएगी राह

दामोदर ठाकुर ज़की

उन के मिलने का ब-ज़ाहिर तो यक़ीं कोई नहीं

दामोदर ठाकुर ज़की

हो सके क्या अपनी वहशत का इलाज

दाग़ देहलवी

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