शाखा Poetry (page 6)

क़दम उठे हैं तो धूल आसमान तक जाए

शकील आज़मी

फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है

शकील आज़मी

मुरझा के काली झील में गिरते हुए भी देख

शकेब जलाली

मिरे ख़ुलूस की शिद्दत से कोई डर भी गया

शकेब जलाली

मैं शाख़ से उड़ा था सितारों की आस में

शकेब जलाली

बे-आब-ओ-बे-ग्याह हुआ उस को छोड़ कर

शकेब अयाज़

केसर में इस तरह से आलूदा है सरापा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तौबा ज़ाहिद की तौबा तल्ली है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

अब की चमन में गुल का ने नाम ओ ने निशाँ है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

आशिक़ों के सैर करने का जहाँ ही और है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ऐ हवाओ! मुझे दामन में छुपा ले जाओ

शैदा रूमानी

रात के वक़्त कोई गीत सुनाती है हवा

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

दुनिया अपनी मौत जल्द-अज़-जल्द मर जाने को है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

दुनिया अपनी मौत जल्द-अज़-जल्द मर जाने को है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

बिखरे हुए तारों से मिरी रात भरी है

शहज़ाद अहमद

अब निभानी ही पड़ेगी दोस्ती जैसी भी है

शहज़ाद अहमद

आँधियाँ आती थीं लेकिन कभी ऐसा न हुआ

शहरयार

रात जुदाई की रात

शहरयार

निकला है चाँद शब की पज़ीराई के लिए

शहरयार

किस फ़िक्र किस ख़याल में खोया हुआ सा है

शहरयार

जहाँ पे तेरी कमी भी न हो सके महसूस

शहरयार

बुनियाद-ए-जहाँ में कजी क्यूँ है

शहरयार

आँधियाँ आती थीं लेकिन कभी ऐसा न हुआ

शहरयार

मता-ए-पास-ए-वफ़ा खो नहीं सकूँगा मैं

शहराम सर्मदी

मर्द---औरत

शहनाज़ नबी

एहसास तो मुझी पे कर रही है

शाहिदा हसन

चराग़-ए-शाम ही तन्हा नहीं है

शाहिदा हसन

बिछड़ गया था कोई ख़्वाब-ए-दिल-नशीं मुझ से

शाहिद ज़की

फ़िक्र-ए-ईजाद में हूँ खोल नया दर कोई

शाहिद कमाल

कैसे तोड़ी गई ये हद्द-ए-अदब पूछते हैं

शाहिद जमाल

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