शाखा Poetry (page 7)

सीने हैं चाक और गरेबाँ सिले हुए

शाहिद इश्क़ी

मिसाल-ए-संग-ए-तपीदा जड़े हुए हैं कहीं

शाहीन मुफ़्ती

बदन के रूप का एजाज़ अंग अंग थी वो

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दर-ए-इम्काँ से गुज़र कर सर-ए-मंज़र आ कर

शाहीन अब्बास

सदा है इस आह-ओ-चश्म-ए-तर से फ़लक पे बिजली ज़मीं पे बाराँ

शाह नसीर

ये किस के सोज़ का है बज़्म-ए-जाँ में इंतिज़ार ऐ दिल

शाह दीन हुमायूँ

रेग-ए-रवाँ पे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा न देखना

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

कहीं कुछ और भी है ख़्वाहिश-ए-दिगर के बा'द

शफ़क़ सुपुरी

अपनी मजबूरी को हम दीवार-ओ-दर कहने लगे

शबनम रूमानी

दोस्ती का सितारा

शब्बीर शाहिद

है अब की फ़स्ल में रंग बहार और ही कुछ

शानुल हक़ हक़्क़ी

ब-पास-ए-एहतियात-ए-आरज़ू ये बार-हा हुआ

शाद आरफ़ी

अजीब शाम थी जब लौट कर मैं घर आया

सीमान नवेद

जब भी भूले से कभी लब पे हँसी आई है

सीमाब सुल्तानपुरी

ये किस ने शाख़-ए-गुल ला कर क़रीब-ए-आशियाँ रख दी

सीमाब अकबराबादी

छुपाता हूँ मगर छुपता नहीं दर्द-ए-निहाँ फिर भी

सीमाब अकबराबादी

आओ फिर गर्मी दयार-ए-इश्क़ में पैदा करें

सीमाब अकबराबादी

वही है दश्त-ए-सफ़र रहगुज़र से आगे भी

सत्तार सय्यद

शिकोह-ए-आब में गुम थे जिहत-निशाँ मेरे

सत्तार सय्यद

लहू में फूल खिलाने कहाँ से आते हैं

सत्तार सय्यद

अपने लिए तज्वीज़ की शमशीर-ए-बरहना

सरवत हुसैन

विसाल

सरवत हुसैन

इक रोज़ मैं भी बाग़-ए-अदन को निकल गया

सरवत हुसैन

भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा

सरवत हुसैन

तश्कील बदर की है कभी है हिलाल की

सरीर काबिरी

नूर की शाख़ से टूटा हुआ पत्ता हूँ मैं

सरदार सलीम

दिन-ब-दिन सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा जाता हूँ

सरदार सलीम

मौत की ख़ुशबू

साक़ी फ़ारुक़ी

कैमरा

साक़ी फ़ारुक़ी

पस-ए-निगाह कोई लौ भड़कती रहती है

सालिम सलीम

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