शहर Poetry (page 10)

मोहब्बत का घर

वर्षा गोरछिया

क़ज़ा जो दे तो इलाही ज़रा बदल के मुझे

वारिस किरमानी

दिल प्यार के रिश्तों से मुकर भी नहीं जाता

वली मदनी

नई सहर है ये लोगो नया सवेरा है

वफ़ा मलिकपुरी

अँधेरी शब में चराग़-ए-रह-ए-वफ़ा देना

उषा भदोरिया

निफ़ाक़

उरूज क़ादरी

ढूँढिए इस शहर में अब किस को हासिल कौन है

उर्मिलामाधव

तअ'स्सुब की फ़ज़ा में ता'ना-ए-किरदार क्या देता

उनवान चिश्ती

सारी दुनिया में दाना है अपने घर में कुछ भी नहीं

उनवान चिश्ती

ज़हर में बुझती हुई बेल है दीवार के साथ

उम्मीद ख़्वाजा

नज़र न आए तो क्या वो मिरे क़यास में है

उम्मीद फ़ाज़ली

जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया

उम्मीद फ़ाज़ली

इक ऐसा मरहला-ए-रह-गुज़र भी आता है

उम्मीद फ़ाज़ली

सफ़र की हद थी जो रात थी

उमर फ़रहत

इक बहाना है तुझे याद किए जाने का

तुफ़ैल बिस्मिल

ताइर-ए-ख़ुश-रंग को बे-बाल-ओ-पर देखेगा कौन

तुफ़ैल अहमद मदनी

बे-क़रारी सी बे-क़रारी है

तौसीफ ताबिश

वाहिमा होगा यहाँ कोई न आया होगा

तौसीफ़ तबस्सुम

जैसे वीरान हवेली में हों ख़ामोश चराग़

तौक़ीर तक़ी

याद और ग़म की रिवायात से निकला हुआ है

तौक़ीर तक़ी

लफ़्ज़ की क़ैद से रिहा हो जा

तौक़ीर तक़ी

कोई तासीर तो है इस की नवा में ऐसी

तौक़ीर तक़ी

आ गई धूप मिरी छाँव के पीछे पीछे

तौक़ीर रज़ा

अपने मंज़र से जुदा था इक दिन

तौक़ीर अब्बास

सदियों लहू से दिल की हिकायत लिखी गई

तसनीम फ़ारूक़ी

फिर तिरे हिज्र के जज़्बात ने अंगड़ाई ली

तसनीम फ़ारूक़ी

ज़मीं पर सर-निगूँ बैठा हुआ हूँ

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

अब ख़ाना-ब-दोशों का पता है न ख़बर है

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

ख़िज़ाँ-नसीबों पे बैन करती हुई हवाएँ

तारिक़ क़मर

जौन-एलिया से आख़री मुलाक़ात

तारिक़ क़मर

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