शहर Poetry (page 12)

ये कार-ए-बे-समर है अगर कर लिया तो क्या

तालिब अंसारी

ये शहर अपनी इसी हाव-हू से ज़िंदा है

तालीफ़ हैदर

ये शहर अपनी इसी हाव-हू से ज़िंदा है

तालीफ़ हैदर

तमाम शहर ही तेरी अदा से क़ाएम है

तालीफ़ हैदर

हम हिज्र के रस्तों की हवा देख रहे हैं

तालीफ़ हैदर

आहिस्ता-रवी शहर को काहिल न बना दे

तालीफ़ हैदर

बेगानगी में यूँही गुज़ारा करेंगे हम

तलअत इशारत

ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब

ताजदार आदिल

शहर के दीवार-ओ-दर पर रुत की ज़र्दी छाई थी

ताज सईद

खिड़की में एक नार जो महव-ए-ख़याल है

ताज सईद

बंद दरीचों के कमरे से पूर्वा यूँ टकराई है

ताज सईद

मुझ को कहानियाँ न सुना शहर को बचा

तैमूर हसन

हम दुनिया से जब तंग आया करते हैं

तैमूर हसन

ये तय हुआ है कि शेर ओ अदब के पैमाने

तहसीन फ़िराक़ी

मुझ सा अंजान किसी मोड़ पे खो सकता है

तहसीन फ़िराक़ी

मुझ सा अंजान किसी मोड़ पे खो सकता है

तहसीन फ़िराक़ी

इसे मैं और ये मेरा असा ही तय करेगा

तहसीन फ़िराक़ी

काग़ज़ पे तेरा नक़्श उतारा नहीं गया

ताहिरा जबीन तारा

बुझ रही है आँख ये जिस्म है जुमूद में

ताहिर अदीम

मिला किसी से न अच्छा लगा सुख़न इस बार

तफ़ज़ील अहमद

मेहवर पे भी गर्दिश मिरी मेहवर से अलग हो

तफ़ज़ील अहमद

इक परेशानी अलग थी और पशेमानी अलग

तफ़ज़ील अहमद

हम को ख़बर है शहर में उस के संग-ए-मलामत मिलते हैं

ताबिश मेहदी

फ़रिश्तों में भी जिस के तज़्किरे हैं

ताबिश मेहदी

यादों की क़िंदील जलाना कितना अच्छा लगता है

ताबिश मेहदी

ख़ता मैं ने कोई भारी नहीं की

ताबिश मेहदी

जहान-ए-दिल में सन्नाटा बहुत है

ताबिश मेहदी

बला से मर्तबे ऊँचे न रखना

ताबिश मेहदी

ये शहर आफ़तों से तो ख़ाली कोई न था

ताबिश कमाल

न देखें तो सुकूँ मिलता नहीं है

ताबिश कमाल

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