शहर Poetry (page 14)

डरता हूँ ज़िंदगी के वसीले नहीं मिले

सय्यद अारिफ़

फ़क़ीह-ए-शहर से कुछ ख़ास दुश्मनी तो नहीं

सय्यद अनवार अहमद

ये कैसे ख़ौफ़ हमें आज फिर सताने लगे

सय्यद अनवार अहमद

हवा का तब्सिरा ये साकिनान-ए-शहर पे था

सय्यद अमीन अशरफ़

वजूद को जिगर-ए-मो'तबर बनाते हैं

सय्यद अमीन अशरफ़

तसलसुल पाएमाली का मिलेगा

सय्यद अमीन अशरफ़

शौक़-ए-वारफ़्ता को मलहूज़-ए-अदब भी होगा

सय्यद अमीन अशरफ़

पेच-दर-पेच सवालात में उलझे हुए हैं

सय्यद अमीन अशरफ़

ख़याल है कि हक़ीक़त है या फ़साना है

सय्यद अमीन अशरफ़

दिल शहर-ए-तहय्युर है कि वो मम्लिकत-आरा

सय्यद अमीन अशरफ़

अजीब शय है तरह-दार भी तमन्ना भी

सय्यद अमीन अशरफ़

कितने जुग बीत गए फिर भी न भूला जाए

सय्यद अहमद शमीम

किस तरह ज़िंदा रहेंगे हम तुम्हारे शहर में

सय्यद अहमद शमीम

नहीं दो क़ुब्बा-ए-पिस्तान शोख़-ओ-शंग सीने पर

सय्यद अाग़ा अली महर

वाइज़-ए-शहर ख़ुदा है मुझे मा'लूम न था

सय्यद आबिद अली आबिद

तेरे मिलने का आख़िरी इम्कान

स्वप्निल तिवारी

समाअतों में बहुत दूर की सदा ले कर

स्वप्निल तिवारी

वापस घर जा ख़त्म हुआ

सालेह नदीम

हर क़दम साँपों की आहट और मैं

सालेह नदीम

सुनी है रौशनी के क़त्ल की जब से ख़बर मैं ने

सुरूर अम्बालवी

अपनी अना के गुम्बद-ए-बे-दर में बंद है

सूरज तनवीर

हाए वो याद कहाँ है कि ख़ुदा ख़ैर करे

सुनील कुमार जश्न

धूप में बैठने के दिन आए

सुनील आफ़ताब

सो उस को छोड़ दिया उस ने जब वफ़ा नहीं की

सुल्तान सुकून

सो उस को छोड़ दिया उस ने जब वफ़ा नहीं की

सुल्तान सुकून

तेरी आँखों पे घने ख़्वाबों का पहरा हूँ मैं

सुलतान सुबहानी

मैं अब्र-ओ-बाद से तूफ़ाँ से सब से डरता हूँ

सुलतान रशक

मौसम-ए-गुल कुंज-ए-गुलशन निकहत-ए-गेसू न हो

सुलतान रशक

ये जो हम अतलस ओ किम-ख़्वाब लिए फिरते हैं

सुल्तान अख़्तर

वही बे-सबब से निशाँ हर तरफ़

सुल्तान अख़्तर

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