शहर Poetry (page 11)

हवा रुकी है तो रक़्स-ए-शरर भी ख़त्म हुआ

तारिक़ क़मर

ये रोज़-ओ-शब की मसाफ़त ये आना जाना मिरा

तारिक़ क़मर

न तुम मिले थे तो दुनिया चराग़-पा भी न थी

तारिक़ क़मर

ख़ुश्क आँखों से कहाँ तय ये मसाफ़त होगी

तारिक़ क़मर

पोशीदा किसी ज़ात में पहले भी कहीं था

तारिक़ नईम

इस रात किसी और क़लम-रौ में कहीं था

तारिक़ नईम

ब-नाम-ए-इश्क़ यही एक काम करते हैं

तारिक़ नईम

ऐसी तक़्सीम की सूरत निकल आई घर में

तारिक़ नईम

अब ये हंगामा-ए-दुनिया नहीं देखा जाता

तारिक़ नईम

यहाँ के लोग हैं बस अपने ही ख़याल में गुम

तारिक़ मतीन

लहू को पालते फिरते हैं हम हिना की तरह

तारिक़ मसऊद

मैं बाम-ओ-दर पे जो अब साएँ साएँ लिखता हूँ

तारिक़ जामी

मैं बाम-ओ-दर पे जो अब साएँ साएँ लिखता हूँ

तारिक़ जामी

डूबा हूँ तो किस शख़्स का चेहरा नहीं उतरा

तारिक़ जामी

दिहात के वजूद को क़स्बा निगल गया

तनवीर सिप्रा

आज इतना जलाओ कि पिघल जाए मिरा जिस्म

तनवीर सिप्रा

सूरतों के शहर में रौज़न ही रौज़न देख कर

तनवीर सामानी

दश्त में जो भी है जैसा मिरा देखा हुआ है

तनवीर सामानी

सूरज सारा शहर डराता रहता है

तनवीर अंजुम

ये बात दश्त-ए-वफ़ा की नहीं चमन की है

तनवीर अहमद अल्वी

लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है

तनवीर अहमद अल्वी

लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है

तनवीर अहमद अल्वी

क्या ज़रूरी है कोई बे-सबब आज़ार भी हो

तनवीर अहमद अल्वी

दिल के भूले हुए अफ़्साने बहुत याद आए

तनवीर अहमद अल्वी

मैं दयार-ए-क़ातिलाँ का एक तन्हा अजनबी

तालिब जोहरी

जैसे ही ज़ीना बोला तह-ख़ाने का

तालिब जोहरी

मैं चाँद भेज रहा हूँ कि तुम को देख आए

तालिब हुसैन तालिब

शराब शहर में नीलाम हो गई होगी

तालिब हुसैन तालिब

भेज कर शहर हारती है मुझे

तालिब हुसैन तालिब

मुझ को दिमाग़-ए-गर्मी-ए-बाज़ार है कहाँ

तालिब चकवाली

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