याद Poetry (page 20)

बुत बने राह तकोगे कब तक

शोहरत बुख़ारी

तिरे आँगन में है जो पेड़ फूलों से लदा होगा

शोभा कुक्कल

जो तसव्वुर में है उस को कोई क्या रौशन करे

शोएब निज़ाम

एक ज़र्रा भी न मिल पाएगा मेरा मुझ को

शोएब बिन अज़ीज़

दिल-ए-आबाद का बर्बाद भी होना ज़रूरी है

शोएब बिन अज़ीज़

न तो गुँध हूँ किसी फूल की न ही फूल हूँ किसी बाग़ का

शिवकुमार बिलग्रामी

बेच दी क्यूँ ज़िंदगी दो-चार आने के लिए

शिवकुमार बिलग्रामी

याद है अब तक मुझे अहद-ए-जवानी याद है

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

मुझ को कहाँ ये होश तिरी जल्वा-गाह में

शिव दयाल सहाब

'मीर' का सोज़-ए-बयाँ हो तो ग़ज़ल होती है

शिव दयाल सहाब

अंदोह-ए-बेश-ओ-कम न ग़म-ए-ख़ैर-ओ-शर में है

शिव दयाल सहाब

फिर मिरी आँख तिरी याद से भर आई है

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

हवा भी गर्म है छाए हैं सुर्ख़ बादल क्यूँ

शिफ़ा कजगावन्वी

यार को रग़बत-ए-अग़्यार न होने पाए

शिबली नोमानी

ग़म से भीगे हुए नग़्मात कहाँ से लाऊँ

शेवन बिजनौरी

ज़िंदगी नाम है जिस चीज़ का क्या होती है

शेर सिंह नाज़ देहलवी

हिजाब-ए-राज़ फ़ैज़-ए-मुर्शिद-ए-कामिल से उठता है

शेर सिंह नाज़ देहलवी

किस रोज़ इलाही वो मिरा यार मिलेगा

शेर मोहम्मद ख़ाँ ईमान

आलम में हुस्न तेरा मशहूर जानते हैं

शेर मोहम्मद ख़ाँ ईमान

तुम जिसे याद करो फिर उसे क्या याद रहे

ज़ौक़

तुम भूल कर भी याद नहीं करते हो कभी

ज़ौक़

रुलाएगी मिरी याद उन को मुद्दतों साहब

ज़ौक़

मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

ज़ौक़

वक़्त-ए-पीरी शबाब की बातें

ज़ौक़

निगह का वार था दिल पर फड़कने जान लगी

ज़ौक़

मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

ज़ौक़

लेते ही दिल जो आशिक़-ए-दिल-सोज़ का चले

ज़ौक़

चश्म-ए-क़ातिल हमें क्यूँकर न भला याद रहे

ज़ौक़

आख़िर तुम्हारे इश्क़ में बर्बाद हो सके

शहज़ाद रज़ा लम्स

किस लिए लुत्फ़ की बातें हैं फिर

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

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