यार Poetry (page 7)

तन्हाई मुझे देखती है

वहीद अहमद

हुस्न और प्यार तिरे पास मैं ले आई हूँ

विश्मा ख़ान विश्मा

जुनूँ के बाब में अब के ये राएगानी हो

विपुल कुमार

ये क़दम क़दम कशाकश दिल बे-क़रार क्या है

वारिस किरमानी

जमाल-ए-नस्तरनी रंग-ओ-बू-ए-यासमनी

वारिस किरमानी

मुमकिन नहीं है अपने को रुस्वा वफ़ा करे

वफ़ा बराही

वो ख़्वाब ही सही पेश-ए-नज़र तो अब भी है

उम्मीद फ़ाज़ली

कर अपनी बात कि प्यारे किसी की बात से क्या

उमर अंसारी

हो के उस कूचे से आई तो सितम ढा गई क्या

उमर अंसारी

मिरी भँवों के ऐन दरमियान बन गया

उमैर नजमी

ये किस से आज बरहम हो गई है

तिलोकचंद महरूम

हैरत-ज़दा मैं उन के मुक़ाबिल में रह गया

तिलोकचंद महरूम

ग़लत की हिज्र में हासिल मुझे क़रार नहीं

तिलोकचंद महरूम

बाइस-ए-इम्बिसात हो आमद-ए-नौ-बहार क्या

तिलोकचंद महरूम

कर के सारी हदों को पार चला

तौक़ीर अहमद

गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते

मीर तस्कीन देहलवी

फ़र्क़ कुछ तो चाहिए अग़्यार से

मीर तस्कीन देहलवी

दिल किस की तेग़-ए-नाज़ से लज़्ज़त-चशीदा है

मीर तस्कीन देहलवी

तू मेरा दोस्त मिरा यार है नहीं है क्या

तरकश प्रदीप

करते हुए तवाफ़ ख़यालात-ए-यार मैं

तरकश प्रदीप

इस रात किसी और क़लम-रौ में कहीं था

तारिक़ नईम

कुछ दूर तक तो इस की सदा ले गई मुझे

तारिक़ बट

इक न इक शम् अँधेरे में जलाए रखिए

तारिक़ बदायुनी

फ़रेब-ए-क़ुर्ब-ए-यार हो कि हसरत-ए-सुपुर्दगी

तनवीर अंजुम

कभी वो मिस्ल-ए-गुल मुझे मिसाल-ए-ख़ार चाहिए

तनवीर अंजुम

ग़म-ए-जहाँ में ग़म-ए-यार ज़म न कर पाया

तालिब हुसैन तालिब

खिड़की में एक नार जो महव-ए-ख़याल है

ताज सईद

ख़्वाब डसते रहे बिखरते रहे

ताहिरा जबीन तारा

सुकून-ए-दिल में वो बन के जब इंतिशार उतरा तो मैं ने देखा

ताहिर फ़राज़

में न कहता था कि शहरों में न जा यार मिरे

ताहिर फ़राज़

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