Friendship Poetry (page 17)

मिरी हयात अगर मुज़्दा-ए-सहर भी नहीं

हनीफ़ फ़ौक़

की नज़र मैं ने जब एहसास के आईने में

हनीफ़ कैफ़ी

हर इक कमाल को देखा जो हम ने रू ब-ज़वाल

हनीफ़ कैफ़ी

यादों का शहर-ए-दिल में चराग़ाँ नहीं रहा

हनीफ़ अख़गर

वो दिल में और क़रीब-ए-रग-ए-गुलू भी मिले

हनीफ़ अख़गर

नफ़स नफ़स ने उड़ाईं हवाइयाँ क्या क्या

हनीफ़ अख़गर

इतना सुकून तो ग़म-ए-पिन्हाँ में आ गया

हनीफ़ अख़गर

इश्क़ जब मंज़िल-ए-आख़िर से गुज़रता होगा

हनीफ़ अख़गर

इस तरह मह-रुख़ों को पशेमाँ करेंगे हम

हनीफ़ अख़गर

सहर-ना-आश्ना कोई नहीं है

हामिदी काश्मीरी

ख़ुद ख़मोशी के हिसारों में रहे

हामिदी काश्मीरी

ख़ुद ही बे-आसरा करते हैं

हामिदी काश्मीरी

रात

हमीदा शाहीन

हमारी ख़्वाहिशों में सरगिरानी भी कहाँ थी

हामिद ज़हूर

पोशीदा अजब ज़ीस्त का इक राज़ है मुझ में

हामिद मुख़्तार हामिद

मआल-ए-दिल के लिए आज यूँ ख़ुदी तरसे

हामिद मुख़्तार हामिद

एक इंसान हूँ इंसाँ का परस्तार हूँ मैं

हामिद मुख़्तार हामिद

मंज़िल कहाँ है दूर तलक रास्ते हैं यार

हामिद इक़बाल सिद्दीक़ी

हर वफ़ा ना-आश्ना से भी वफ़ा करना पड़ी

हामिद इलाहाबादी

इक रोज़ जो गुलशन में वो जान-ए-बहार आए

हामिद इलाहाबादी

सवाल दिल का शाम-ए-ग़म को और उदास कर गया

हमीद नसीम

तिरे करम से तिरी बे-रुख़ी से क्या लेना

हमीद नागपुरी

क़ुबूल कर के तेरा ग़म ख़ुशी ख़ुशी मैं ने

हमीद नागपुरी

मुझे रहीन-ए-ग़म-ए-जाँ-नवाज़ रहने दे

हमीद नागपुरी

फ़िक्र पाबंदी-ए-हालात से आगे न बढ़ी

हमीद नागपुरी

कभी तो रंग-ए-हुस्न-ए-यार देखूँ

हमीद कौसर

किस शान से गए हैं शहीदान-ए-कू-ए-यार

हमीद जालंधरी

सीने में राज़-ए-इश्क़ छुपाया न जाएगा

हमीद जालंधरी

किस वहम में असीर तिरे मुब्तला हुए

हमीद जालंधरी

कल शाम लब-ए-बाम जो वो जल्वा-नुमा था

हमीद जालंधरी