Friendship Poetry (page 100)
तिरे कूचे का रहनुमा चाहता हूँ
आसी ग़ाज़ीपुरी
सारे आलम में तेरी ख़ुशबू है
आसी ग़ाज़ीपुरी
क़तरा वही कि रू-कश-ए-दरिया कहें जिसे
आसी ग़ाज़ीपुरी
फिर मिज़ाज उस रिंद का क्यूँकर मिले
आसी ग़ाज़ीपुरी
न मेरे दिल न जिगर पर न दीदा-ए-तर पर
आसी ग़ाज़ीपुरी
इतना तो जानते हैं कि आशिक़ फ़ना हुआ
आसी ग़ाज़ीपुरी
बादबाँ खोलेगी और बंद-ए-क़बा ले जाएगी
आशुफ़्ता चंगेज़ी
अरक़ जब उस परी के चेहरा-ए-पुर-नूर से टपके
आरिफ़ुद्दीन आजिज़
कुछ भी नहीं है पास तुम्हारी दुआ तो है
आनन्द सरूप अंजुम
हवा चली है न पत्ता कोई हिला अब तक
आनन्द सरूप अंजुम
हर दुआ होगी बे-असर न समझ
आनन्द सरूप अंजुम
हर बार हुआ है जो वही तो नहीं होगा
आलोक श्रीवास्तव
अगर सफ़र में मिरे साथ मेरा यार चले
आलोक श्रीवास्तव
आती है धार उन के करम से शुऊर में
आल-ए-अहमद सूरूर
टीपू की आवाज़
आल-ए-अहमद सूरूर
ज़ंजीर से जुनूँ की ख़लिश कम न हो सकी
आल-ए-अहमद सूरूर
सियाह रात की सब आज़माइशें मंज़ूर
आल-ए-अहमद सूरूर
सफ़र तवील सही हासिल-ए-सफ़र क्या था
आल-ए-अहमद सूरूर
लोग तन्हाई का किस दर्जा गिला करते हैं
आल-ए-अहमद सूरूर
ख़्वाबों से यूँ तो रोज़ बहलते रहे हैं हम
आल-ए-अहमद सूरूर
जिस ने किए हैं फूल निछावर कभी कभी
आल-ए-अहमद सूरूर
हम न इस टोली में थे यारो न उस टोली में थे
आल-ए-अहमद सूरूर
हमें तो मय-कदे का ये निज़ाम अच्छा नहीं लगता
आल-ए-अहमद सूरूर
दास्तान-ए-शौक़ कितनी बार दोहराई गई
आल-ए-अहमद सूरूर
आज से पहले तिरे मस्तों की ये ख़्वारी न थी
आल-ए-अहमद सूरूर
तिरे जलाल से ख़ुर्शीद को ज़वाल हुआ
आग़ा अकबराबादी
सिक्का-ए-दाग़-ए-जुनूँ मिलते जो दौलत माँगता
आग़ा अकबराबादी
शिद्दत-ए-ज़ात ने ये हाल बनाया अपना
आग़ा अकबराबादी
नुमूद-ए-क़ुदरत-ए-पर्वरदिगार हम भी हैं
आग़ा अकबराबादी
निगाहों में इक़रार सारे हुए हैं
आग़ा अकबराबादी