Friendship Poetry (page 22)
हसीनों से फ़क़त साहिब-सलामत दूर की अच्छी
हफ़ीज़ जौनपुरी
यूँ उठा दे हमारे जी से ग़रज़
हफ़ीज़ जौनपुरी
ये सब कहने की बातें हैं कि ऐसा हो नहीं सकता
हफ़ीज़ जौनपुरी
वस्ल आसान है क्या मुश्किल है
हफ़ीज़ जौनपुरी
उस को आज़ादी न मिलने का हमें मक़्दूर है
हफ़ीज़ जौनपुरी
साथ रहते इतनी मुद्दत हो गई
हफ़ीज़ जौनपुरी
मिरे ऐबों की इस्लाहें हुआ कीं बहस-ए-दुश्मन से
हफ़ीज़ जौनपुरी
लिख दे आमिल कोई ऐसा ता'वीज़
हफ़ीज़ जौनपुरी
किसी को देख कर बे-ख़ुद दिल-ए-काम हो जाना
हफ़ीज़ जौनपुरी
जान ही जाए तो जाए दर्द-ए-दिल
हफ़ीज़ जौनपुरी
हसीनों से फ़क़त साहिब-सलामत दूर की अच्छी
हफ़ीज़ जौनपुरी
गो ये रखती नहीं इंसान की हालत अच्छी
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल इस लिए है दोस्त कि दिल में है जा-ए-दोस्त
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल है तो तिरे वस्ल के अरमान बहुत हैं
हफ़ीज़ जौनपुरी
बिगड़ जाते थे सुन कर याद है कुछ वो ज़माना भी
हफ़ीज़ जौनपुरी
अजब ज़माने की गर्दिशें हैं ख़ुदा ही बस याद आ रहा है
हफ़ीज़ जौनपुरी
अफ़्सुर्दगी-ए-दिल से ये रंग है सुख़न में
हफ़ीज़ जौनपुरी
अब तो नहीं आसरा किसी का
हफ़ीज़ जौनपुरी
रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
हफ़ीज़ जालंधरी
ऐ 'हफ़ीज़' आह आह पर आख़िर
हफ़ीज़ जालंधरी
अहबाब का शिकवा क्या कीजिए ख़ुद ज़ाहिर ओ बातिन एक नहीं
हफ़ीज़ जालंधरी
मेरी शाएरी
हफ़ीज़ जालंधरी
इरशाद की याद में
हफ़ीज़ जालंधरी
ये क्या मक़ाम है वो नज़ारे कहाँ गए
हफ़ीज़ जालंधरी
ये और दौर है अब और कुछ न फ़रमाए
हफ़ीज़ जालंधरी
तिरे दिल में भी हैं कुदूरतें तिरे लब पे भी हैं शिकायतें
हफ़ीज़ जालंधरी
रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
हफ़ीज़ जालंधरी
फिर लुत्फ़-ए-ख़लिश देने लगी याद किसी की
हफ़ीज़ जालंधरी
निगाह-ए-आरज़ू-आमोज़ का चर्चा न हो जाए
हफ़ीज़ जालंधरी
मुद्दतों तक जो पढ़ाया किया उस्ताद मुझे
हफ़ीज़ जालंधरी