Love Poetry (page 16)
है तिरा गाल माल बोसे का
इंशा अल्लाह ख़ान
है मुझ को रब्त बस-कि ग़ज़ालान-ए-रम के साथ
इंशा अल्लाह ख़ान
है जिस में क़ुफ़्ल-ए-ख़ाना-ए-ख़ुम्मार तोड़िए
इंशा अल्लाह ख़ान
गली से तेरी जो टुक हो के आदमी निकले
इंशा अल्लाह ख़ान
गाली सही अदा सही चीन-ए-जबीं सही
इंशा अल्लाह ख़ान
गाहे गाहे जो इधर आप करम करते हैं
इंशा अल्लाह ख़ान
फ़क़ीराना है दिल मुक़ीम उस की रह का
इंशा अल्लाह ख़ान
एक दिन रात की सोहबत में नहीं होते शरीक
इंशा अल्लाह ख़ान
दिल-ए-सितम-ज़दा बेताबियों ने लूट लिया
इंशा अल्लाह ख़ान
देखना जब मुझे कर शान ये गाली देना
इंशा अल्लाह ख़ान
छेड़ने का तो मज़ा जब है कहो और सुनो
इंशा अल्लाह ख़ान
चाहता हूँ तुझे नबी की क़सम
इंशा अल्लाह ख़ान
भले आदमी कहीं बाज़ आ अरे उस परी के सुहाग से
इंशा अल्लाह ख़ान
बस्ती तुझ बिन उजाड़ सी है
इंशा अल्लाह ख़ान
बंदगी हम ने तो जी से अपनी ठानी आप की
इंशा अल्लाह ख़ान
बात के साथ ही मौजूद है टाल एक न एक
इंशा अल्लाह ख़ान
अश्क मिज़्गान-ए-तर की पूँजी है
इंशा अल्लाह ख़ान
अमरद हुए हैं तेरे ख़रीदार चार पाँच
इंशा अल्लाह ख़ान
अच्छा जो ख़फ़ा हम से हो तुम ऐ सनम अच्छा
इंशा अल्लाह ख़ान
आने अटक अटक के लगी साँस रात से
इंशा अल्लाह ख़ान
उस के नाम जिसे तारीकी निगल चुकी
इंजिला हमेश
तज़ाद
इंजिला हमेश
शाख़-ए-अदम
इंजिला हमेश
रक़्स-ए-आगही
इंजिला हमेश
मोहब्बत
इंजिला हमेश
कर्ब आगही
इंजिला हमेश
जिला
इंजिला हमेश
एक कहानी इश्क़ की
इंजिला हमेश
बाज़याफ़्त
इंजिला हमेश
अन-देखी ज़मीं पर
इंजिला हमेश